सामान नागरिक संहिता और तीन तलाक के मुद्दे पर देश भर में चल रही बहस के बीच मंगलवार को इंदिरा नगर बड़ी मस्जिद स्थित मदरसा अहले-सुन्नत रियाजुल उलूम में जलसा आयोजित किया गया।
इस दौरान उलमा ने शरीयत में हस्तक्षेप को धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया। उनका कहना है कि सरकारों को शरई मसलों में दखलअंदाजी और बयानबाजी के बजाय देश के विकास पर ध्यान देना चाहिए।
बरेली से आए मौलाना शहजाद आलम ने कहा कि शरई कानून में बदलाव किसी भी सूरत में मंजूर नहीं। कुरान और हदीस में हर मसले का हल है इसलिए इसमें कोई बदलाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उलेमा भी चाहें, तो इसके कानून को नहीं बदल सकते।
हिंदुस्तान में देश की आजादी से पहले और बाद में भी यही तरीका अपनाया गया। भारतीय संविधान भी इसकी इजाजत है। इस्लामी शरीयत में तब्दीली नहीं की जा सकती है। जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना शाहिद अजहरी ने कहा कि अल्लाह ने अपने बनाए कानून में सबसे ज्यादा नापसंद तलाक को किया है, इसे सिर्फ मजबूरी में जब सुलह का कोई रास्ता बाकी न रह जाए, तब इस्तेमाल करने का हुक्म है।
केंद्र सरकार साजिशन इसमें हस्तक्षेप कर रही है। उनके नापाक इरादे कामयाब नहीं होने देंगे। जलसे की सदारत जमात के नायब सदर मुफ्ती सलमान रजा कादरी ने की और संचालन हाफिज नाजिर रजा ने किया। जलसे को मदरसे के प्रबंधक मुुफ्ती सय्यद इरफान रसूल, मुफ्ती नईमुद्दीन, मुफ्ती नईम अजहरी आदि ने खिताब किया। इस दौरान मौलाना अकरम, अकील रजा, सैय्यद मोहसिन अली आदि ने सहयोग दिया।
नाकामी छुपाने के लिए तीन तलाक का सहारा ले रही केंद्र सरकार
तीन तलाक के मुद्दे पर हस्तक्षेप को जमात रजा-ए-मुस्तफा के नायब सदर मुफ्ती सलमान रजा कादरी ने दीन और शरीयत से खिलवाड़ करार दिया। पत्रकारों से वार्ता में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपनी तीन साल की नाकामी छुपाने के लिए तीन तलाक और अन्य को बेवजह बहस का मुद्दा बना रही है।
साथ ही भाजपा को यह भी डर है कि एक तलाक दिल्ली में मिल गई और दूसरी बिहार में, कहीं ऐसा न हो कि यूपी-उत्तराखंड में तीसरी तलाक मिल जाए।
मुफ्ती सलमान ने कहा कि औरतों को जितनी इज्जत इस्लाम ने दी है, उतनी किसी धर्म में नहीं। यहां विरासत में हिस्सा दिया जाता है। एक-एक इंच पर बहन-भाई का हिस्सा होता। कहा कि मुल्क की आजादी में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबने मिलकर लड़ाई लड़ी और इसके बाद अपना कानून बनाने की बात आई तो इसमें सभी अपने मजहब को मानने की आजादी की जमानत दी गई।
इसे फंडामेंटल राइट में रखा गया। हमारा कौन सा काम हमारे धर्म का जरूरी हिस्सा है, यह फैसला करना धर्म वाले का काम है। इससे बाहर जाने का मतलब वह अपने ईमान को खत्म कर रहा है।
जहां तक तलाक के तरीके की बात है यह समझाना हमारा काम है। हमारी समाज सुधार की जो मीटिंग होती है उसमें समझाया जाता है कि शादी विवाह का बंधन जीवन का बहुत बड़ा आधार है। इसको तोड़ना बहुत बड़ी बेवकूफी है। यही बात है कि आज भी मुस्लिमों में तलाक का रेशियो दूसरे मजहबों के हिसाब से बहुत कम है।
जमात रजा-ए-मुस्तफा की प्रदेश इकाई गठित
जमात रजा-ए-मुस्तफा की प्रदेश इकाई का गठन कर दिया गया है। मौलाना शाहिद रजा को प्रदेश अध्यक्ष और मौलाना अकरम इसहाकी को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही तसव्वुर अली खां उपाध्यक्ष, गुलाम गौस संयुक्त सचिव बनाए गए।