धार्मिक मान्यताओं के अनुसारए शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। इसी विश्वास के चलते दूध, चावल और मिश्री से बनी खीर को रातभर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। मान्यता है कि इससे आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन रात्रि में लक्ष्मी पूजन और जागरण भी किया जाता है।
ज्योतिष डॉ. मंजु जोशी ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूर्णिमा 25 को सुबह 11:57 बजे शुरू होकर 26 अक्तूबर को सुबह 9:42 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय का समय शाम 5:44 बजे बताया गया है। हालांकि, चंद्रोदय का स्थानीय समय अलग-अलग स्थानों पर भिन्न हो सकता है। ज्योतिष डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि इस दिन कनक धारा स्रोत का पाठ शुभ होता है। इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि, बुधादित्य और लक्ष्मी-नारायण योग बनने की संभावना है।