सेंटर फार ईकोलाजी डेवलपमेंट एंड रिसर्च (सीडार) की दो दिवसीय संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञों ने नैनीझील के लिए सूखाताल झील को अहम बताया। कहा नैनीझील को प्राप्त प्राकृतिक जल में सूखाताल की भागीदारी 50 फीसदी है। उन्होंने इस पर गहनशोध की जरूरत भी बताई।
सीडार के अधिशासी निदेशक डा.राजेश तदानी ने कहा पूर्व की रिसर्च इस तथ्य को प्रमाणित करती हैं कि विभिन्न प्राकृतिक स्रोतों से नैनीझील को मिलने वाले पानी में 50 फीसदी की भागीदारी सूखाताल की है, वह भी मानसून से अलग। चेयरमैन सीडार प्रो.एसपी सिंह ने कहा सूखाताल झील का 19वीं शताब्दी के नक्शों में भी उल्लेख है।
वाडिया इंस्टीट्यूट के डा.एस के भरतरिया ने कहा नैनीझील व सूखाताल में लगे ट्यूबवैल से प्रतिदिन 18 से 20 मिलियन लीटर पानी बोरिंग किया जाता है, जो 7.3 मिलियन क्यूबिक मीटर वार्षिक है। इसका वाल्यूम नैनीझील के कुल वाल्यूम के बराबर है।
भू-विज्ञान विभाग के प्रो.पीडी पंत ने 1880 के नैनीताल स्लाइड, बलियानाले का 1915 व 1923 के वीरभट्टी स्लाइड के बारे में बताया। इस मौके पर जिलाधिकारी दीपक रावत, प्रो.बीके जोशी, चेतन अग्रवाल, हिमांशु कुलकर्णी, डा.पुष्किन फर्त्याल, प्रो.आरके पांडे, सीडार समन्वयक विशाल सिंह, डा.आरजे आजमी, डा.एसपी राय, डा.सुमित सेन आदि मौजूद थे।
बलियानाला भी जरूरी
गोष्ठी में मौजूद जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि विशेषज्ञों के प्रस्ताव को शासन स्तर पर भेजा जाएगा। यदि स्वीकृति मिली तो शोध की कवायद की जाएगी। उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सूखाताल से ज्यादा बलियानाला पर शोध व कार्य की जरूरत बताई।