फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ज्ञान की आंखों से दुनिया देखेंगी

Mon, 09 Mar 2015 12:26 AM IST
निशांत खनी/अमर उजाला,हल्द्वानी
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों की उड़ान होती है। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके हौसलों में जान होती है। नेशनल एसोसिएशन फार दि ब्लाइंड (नैब) की पूजा शर्मा और पूजा मेहता ने इसे साबित किया है। पूजा शर्मा पूरी तरह दृष्टि बाधित और पूजा मेहता की आंखों में थोड़ी बहुत रोशनी है। दोनों ही छात्राओं में ज्ञान की आंखों से दुनिया देखने और दिखाने का जज्बा है। अभी दोनों हल्द्वानी डिग्री कालेज में पढ़ रही हैं।

पूजा मेहता अल्मोड़ा डीना पानी निवासी बलवंत सिंह मेहरा की बेटी हैं। 18 वर्षीय पूजा अल्प दृष्टि बाधित है। पूजा मेहरा बेहद होशियार और होनहार है। उसकी हाईस्कूल की पढ़ाई गौलापार नवाडखेड़ा स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से हुई है। इंटर की पढ़ाई जीजीआईसी हल्द्वानी में की। मेहरा ने इंटर की परीक्षा 64.4 प्रतिशत अंकों से पास कर महिला डिग्री कालेज में प्रवेश लिया है। वह बीए प्रथम वर्ष में पढ़ रही है। पूजा पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं।
विज्ञापन


किच्छा बरा गांव की पूजा शर्मा पुत्री ओम प्रकाश शर्मा पूरी तरह दृष्टि बाधित हैं। वह एमबी पीजी कालेज में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। पूजा ने इंटर तक की पढ़ाई शौर्य मेमोरियल ब्लाइंड स्कूल देहरादून से की है। 2014 में वह हल्द्वानी स्थित गौलापार नैब आई। पूजा शर्मा देख नहीं सकती है। बावजूद इसके वह क्लास में सुनकर ही याद कर लेती है। उसकी समझने और याद करने की क्षमता आम विद्यार्थियों से कहीं ज्यादा है। नैब में वह अपने विषयों की ऑडियो रिकार्डिंग सुनती है। पूजा शर्मा के परिवार में भाई-बहन हैं, जो उससे मिलने अक्सर नैब आते हैं। पूजा शर्मा मिलनसार और संगीत प्रेमी हैं।
विज्ञापन



नैब के महासचिव श्याम धानिक बताते हैं, नैब में दृष्टि बाधित बच्चों को ब्रेल लिपि के साथ ऑडियो रिकार्डिंग के माध्यम से पढ़ाया जाता है। पूजा शर्मा और मेहता को कालेज में कोई परेशानी नहीं होती है। दूसरे विद्यार्थियों की तरह वह पढ़ाई करती हैं और अपने कैरियर के प्रति गंभीर हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें