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भरण-पोषण के लिए अब एसडीएम का दरवाजा खटखटा सकेंगे अभिभावक

Tue, 31 Mar 2015 01:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
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एसडीएम की अध्यक्षता में भरण पोषण अधिकरण का गठन किया गया है। माता-पिता अब संतान से तिरस्कार मिलने पर भरण-पोषण के लिए एसडीएम का दरवाजा खटखटा सकेंगे। फैसले से असंतुष्ट होने पर डीएम की अध्यक्षता में गठित अपीलीय अधिकरणों ट्रिब्यूनल में अपील की जा सकेगी। जिला समाज कल्याण अधिकारी को भरण-पोषण अधिकारी का जिम्मा सौंपा गया है। अभिभावकों के लिए भरण-पोषण अधिनियम 2007 को लागू कर दिया गया है।
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भारत का नागरिक और 60 वर्ष से आयु अधिक होने पर जैविक, दत्तक, सौतेला पिता या सौतेली माता इस दायरे में आएंगे। भरण-पोषण में आहार, वस्त्र, निवास और चिकित्सा परिचर्या उपलब्ध कराने को शामिल किया गया है। धारा 7 के तहत भरण-पोषण अधिकरण का गठन किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवश्यक आहार, स्वास्थ्य, देखरेख, आमोद-प्रमोद केंद्रों और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। नियमावली के तहत भरण-पोषण अधिकरण और सुलह अधिकारी के रूप में प्रक्रिया निर्धारित की गई है। समाज कल्याण निदेशक वीएस धानिक ने बताया कि भरण-पोषण के लिए आने वाले आवेदन की जांच सुलह अधिकारी करेंगे। प्रतिपक्षों को नोटिस दिया जाएगा और प्रतिपक्ष के न आने पर अधिकरण एक पक्षीय कार्य करते हुए निर्णय सुना सकता है। उन्होंने बताया कि बालक और नातेदारों पर भी मुकदमा चलाने की प्रक्रिया निर्धारित है। धानिक ने बताया कि भरण पोषण के लिए एसडीएम की अध्यक्षता में भरण पोषण अधिकरण गठित किया गया है। भरण-पोषण के तहत अधिकतम दस हजार रुपए की धनराशि प्रतिमाह तक हो सकती है। उन्होंने बताया कि जिले स्तर पर अपीलों के निस्तारण को डीएम की अध्यक्षता में अपीलीय अधिकरणों का गठन किया गया है। धानिक ने बताया कि वरिष्ठ नागरिक अपने आवेदन जिला समाज कल्याण अधिकारी/भरण-पोषण अधिकारी को दे सकते हैं।
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