बेतालघाट ब्लाक के राइंका धनियाकोट में जो हालात हैं, उससे तो कम से कम बेटियां आगे बढ़ने से रहीं। इस स्कूल में पढ़ने आने वाली बेटियां अव्यवस्थाओं की शिकार हो रही हैं। ऐसा ही मामला बुधवार को तब सामने आया जब कक्षा आठ की कुछ छात्राओं को मिड-डे-मील के लिए पानी ढोने गधेरे पर भेज दिया गया।
रास्ते में एक छात्रा असंतुलित होकर गिर पड़ी। उसके मुंह और नाक फूट गए। यही नहीं, लापरवाही की हद तो तब हो गई जब कार्यवाहक प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने बिना इलाज कराए ही घायल छात्रा को घर भेज दिया।
राइंका धनियाकोट में पिछले काफी समय से पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त है। इस कारण मिड-डे-मील बनाने में पानी की दिक्कत होती है। इसके लिए स्कूल से रोज कुछ बच्चों के ग्रुप को पानी ढोने के लिए भेजा जाता है। बुधवार को मिड-डे-मील बनाने के लिए कक्षा आठ की कुछ छात्राओं को पास के गधेरे में पानी ढोने के लिए भेज दिया गया। छात्राएं अभी बीच रास्ते में ही थीं कि खेत की पगडंडी पर चलते समय एक छात्रा गीता असंतुलित होकर गिर पड़ी। उसके मुंह, नाक फूट गए और खून आने लगा।
साथी छात्राएं बिना पानी लिए ही घायल गीता को लेकर स्कूल पहुंचीं। यहां कार्यवाहक प्रधानाचार्य हरीश चंद्र आर्य और अन्य शिक्षकों ने छात्रा का इलाज कराए बिना ही घर भेज दिया। घर पहुंचने के बाद परिजन उसे निजी वाहन से सीएचसी खैरना लेकर आए, जहां उसका इलाज कराया गया।
छात्रा के पिता हरीश चंद्र जलाल, अभिभावक संघ के अध्यक्ष कृपाल सिंह मेहरा, पूर्व अध्यक्ष जगमोहन सिंह जलाल समेत ग्रामीणों ने विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि स्कूल में पिछले काफी समय से चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से पानी मंगवाने के बजाए छात्राओं से पानी मंगवाया जा रहा है। उन्होंने घटना की जानकारी मुख्य शिक्षा अधिकारी को देते हुए कार्रवाई की मांग की है।
इधर, विद्यालय के प्रधानाचार्य वीपी द्विवेदी का कहना है कि वह विभागीय बैठक के लिए शिक्षा भवन गए हुए थे। कार्यवाहक प्रधानाचार्य हरीश चंद्र आर्य से पूछताछ की जाएगी कि छात्रा का इलाज क्यों नहीं कराया गया। उनका कहना था कि स्कूल में पानी की किल्लत है, जिसके चलते कई बार छात्राएं स्वयं ही पानी लेने चली जाती हैं।