हल्द्वानी। आईवीआरआई मुक्तेश्वर में कोरोना जांच बंद हो गई है। इसकी वजह बिजली गिरने से कोविड जांच मशीन का खराब होना बताया जा रहा है।
पिछले साल कोरोना जांच की सुविधा शुरुआती दिनों में सिर्फ मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी में थी। बाद में अन्य जगहों पर सुविधाओं को विकसित करने का काम शुरू किया गया। इसी क्रम में आईवीआरआई मुक्तेश्वर में कोरोना की जांच शुरू की गई थी। यहां पर प्रतिदिन तीन सौ या इससे अधिक सैंपलों की जांच हो रही थी लेकिन अब दस दिन से भी अधिक समय से जांच बंद है।
आईवीआरआई मुक्तेश्वर के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. अशोक मोहंती ने बताया कि एक मशीन थी, जो खराब हो गई है। इसे ठीक कराने के लिए जिला प्रशासन से धनराशि देने का अनुरोध किया गया है। इस संबंध में पत्र भी लिखा है।
संस्थान के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. पुतान सिंह ने बताया कि पिछले साल से संस्थान अपने संसाधनों से जांच कर रहा था। कुछ दिन पूर्व बिजली गिरने से मशीन खराब हो गई। इसके चलते जांच बंद है। शासन, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से वैकल्पिक तौर पर मशीन उपलब्ध कराने या खराब मशीनों को ठीक कराने का अनुरोध किया गया है। संस्थान अपने स्तर से भी प्रयास कर रहा है।
अप्रैल से 50 हजार से अधिक जांचें सरकारी संस्थानों में र्हुइं
जिले की दो सरकारी और प्राइवेट लैब के माध्यम से कोरोना सैंपलों की जांच कराई गई है। अप्रैल से 15 जून तक 58 हजार से अधिक जांच सरकारी संस्थानों में की गई है, जबकि 19 हजार से अधिक कोरोना सैंपल की जांच स्वास्थ्य विभाग ने निजी लैबों के माध्यम से कराई है। स्वास्थ्य विभाग ने 15 जून तक आरटीपीसीआर, ट्रूूनेट और एंटीजन के माध्यम से कुल 3,90,259 जांचें कराईं हैं। इसमें सिर्फ आरटीपीसीआर से 2,93,908 जांचें हुईं हैं। कुल जांचों में 36,857 रोगी रिपोर्ट हुए थे।
आईवीआरआई मुक्तेश्वर के अधिकारियों से बात की गई है। वह अपने स्तर पर मशीन को ठीक कराने का प्रयास कर रहे हैं। मशीनों को दुरुस्त कराने के लिए आवश्यक धनराशि की मांग शासन से की गई है। धनराशि मिलते ही संस्थान को उपलब्ध करा दी जाएगी। - डॉ. भागीरथी जोशी, सीएमओ
जांच के लिए जो भी उपकरण इस्तेमाल होते थे, उनका खर्च आईवीआरआई को दिया जाता था। मशीनों को ठीक कराने के लिए धनराशि शासन से मांगी गई है।
- धीराज सिंह गर्ब्याल, डीएम।