हल्द्वानी/नैनीताल। हाईकोर्ट से आरटीआई कार्यकर्ता भाष्कर बृजवासी को राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सजा के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए लोअर कोर्ट के फैसले को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। हाईकोर्ट ने एडीजे कोर्ट हल्द्वानी से मामले में रिकॉर्ड भी तलब किया है। न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दीप चंद्र जोशी ने बताया कि प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने एमबीपीजी कॉलेज सफाई कर्मचारी बिट्ठन के साथ 25 मार्च 2005 को की गई मारपीट और धोखाधड़ी के मामले में भाष्कर बृजवासी, शेखर और दीप को 6 नवंबर 2019 को तीन साल सजा सुनाई थी। निचली अदालत के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
बताया गया कि बिट्ठन की ओर से दर्ज प्राथमिकी ट्रायल के दौरान निरस्त हो गई थी। इस मामले में सिविल जज जूनियर डिविजन ने भी 17 दिसंबर 2013 को निर्णय भी था। हाईकोर्ट नेे तथ्यों का अवलोकन करने के बाद छह नवंबर 2019 के निचली अदालत के निर्णय को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया। वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता भाष्कर का कहना है कि लोअर कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट ने तलब करने के लिए समन भी जारी किया है।