हल्द्वानी। राज्यसभा के बहाने हरीश रावत सरकार के मंत्रियों की दबाव की राजनीति भी चरम पर है। कांग्रेस सूत्रों की माने तो बाजपुर विधायक और राजस्व मंत्री यशपाल आर्य की नाराजगी की असल वजह ऊधमसिंह नगर में पसंद के अधिकारियों की पोस्टिंग न होने को लेकर है। बताया जा रहा है कि दून में मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ हुई बैठक में इस गतिरोध को दूर कर लिया गया है। ऐसे में प्रदीप टम्टा का नाम बदले जाने की संभावना कम है। इसी तरह पर्यटन मंत्री दिनेश धनै के एक मामले को भी हरीश रावत ने हरी झंडी दे दी है। ऐसे में पीडीएफ के भी पटरी पर आने की राह बन गई है।
पसंद के अधिकारियों को लेकर हाल में संसदीय कार्य मंत्री इंदिरा हृदयेश की अध्यक्ष्ता में एक कमेटी का गठन भी किया गया था। सूत्रों के मुताबिक आर्य ने ऊधमसिंह नगर के लिए एक खास अधिकारी की मांग की हुई थी। इस अधिकारी के नाम पर खुद इंदिरा हृदयेश भी तैयार नहीं हैं। इस गतिरोध के चलते आर्य पहले से ही नाराज थे। ऐसे में राज्यसभा के नाम पर आर्य को बहाना मिला तो उन्हें अपनी नाराजगी जताने का मौका भी मिल गया। रविवार को दून में हुई बैठक में इस गतिरोध को दूर कर लिया गया।
सूत्रों का यह भी कहना है कि पर्यटन मंत्री दिनेश धनै का भी जमीन से संबंधित एक मामला अटका हुआ है। इस मामले को हरीश रावत लटकाये हुये थे। इस स्थिति को देखते हुये दिनेश धनै भी राज्यसभा के बहाने खुलकर सामने आ गए। अब बताया जा रहा है कि हरीश रावत ने दिनेश धनै की इस मांग को भी स्वीकार कर लिया है। ऐसे में पीडीएफ का कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन में उतर जाने की राह साफ हो गई है और कांग्रेस प्रत्याशी टम्टा का नाम बदले जाने की संभावना भी कम हो गई है।