भीमताल(नैनीताल)। किसानों की आजीविका बढ़ाने के लिए आत्मा परियोजना के तहत जिले में पहली बार धारी, हल्द्वानी और कोटाबाग में खपली गेहूं की खेती की जा रही है। जिले में 13 हेक्टेयर भूमि में खपली गेहूं को प्रयोग के तौर पर बोया गया है। प्रयोग सफल होने पर जिले के सभी आठों विकासखंडों में किसान खपली गेहूं की खेती कर सकेंगे। खपली गेहूं 300 रुपये किलो बिकता है।
खपली गेहूं का बीज गुजरात से 300 रुपये किलो की दर से खरीदा गया। 30 से अधिक किसानों के माध्यम से 13 हेक्टेयर भूमि पर इसकी खेती की गई है। आत्मा परियोजना के अधिकारियों का दावा है की उत्तराखंड में नैनीताल जिले में पहली बार खपली गेहूं की खेती की जा रही है। खपली गेहूं बहुत पुराना होने के साथ महंगा है। संवाद
डायबिटीज के रोगियों के लिए है फायदेमंद
खपली गेहूं एक हाइब्रिड गेहूं की किस्म है। ये गेहूं की एक प्राचीन प्रजाति है जिसे एम्मर लांग वीट भी कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खपली के गेहूं के आटे का डायबिटीज के रोगियों के लिए वरदान कहा जाता है। इस गेहूं की विशेषता है कि इसमें फाइबर अधिक मात्रा में होता है और प्रोटीन अच्छा होता है। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इस प्राचीन अनाज को खाने के बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ हैं।
जिले में पहली बार खपली गेहूं को 13 हेक्टेयर भूमि पर प्रयोग के तौर पर लगाया है। यह गेहूं स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद और महंगा है। गेहूं का प्रयोग सफल होने पर इसे क्लस्टर के तौर पर लगाया जाएगा। इससे किसानों की आजीविका में वृद्धि होगी।
कमल पंत, उप परियोजना निदेशक, नैनीताल