पहाड़ पर रोडवेज की बसें आम आदमी के लिए आवाजाही का एकमात्र साधन हैं। ये बसें इतनी खटारा हैं कि कभी-कभी आधे सफर में ही यात्रियों को छोड़ देती हैं। कंडम हो चुकीं इन बसों में सफर जान जोखिम में डालने जैसा है। मानसूनकाल में ये बसें यात्रियों का दर्द और बढ़ा रही हैं। टूटीं खिड़कियों से बारिश का पानी बसों में भर जाता है। छतें टपकती रहती हैं। लिहाजा, यात्रियों को रेनकोट पहनकर या छाता ओढ़कर सफर करना पड़ता है। कई बसों की सीटें बैठने लायक नहीं हैं। किसी का कवर फटा है तो किसी की गद्दी खराब है। अमर उजाला ने शुक्रवार को रोडवेज बसों हाल जाना तो यह तस्वीर सामने आई।