हल्द्वानी। राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की तस्वीर निजी और व्यावसायिक वाहनों में अलग-अलग दिखाई दे रही है। नीति आयोग की इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स-2025 के अनुसार, वर्ष 2025 में राज्य में नए पंजीकृत निजी वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी चार फीसदी रही। व्यावसायिक वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 16 फीसदी दर्ज की गई। व्यावसायिक क्षेत्र में ईवी वाहन चार गुना अधिक हुए हैं।
रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विभिन्न पहलुओं को मिलाकर उत्तराखंड को 26 अंक मिले हैं। राज्य को पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के समूह में रखा गया है। इस समूह में मणिपुर को 46, त्रिपुरा को 36 और असम को 35 अंक मिले। हिमाचल प्रदेश का स्कोर 28 और जम्मू-कश्मीर का 31 रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से जुड़े छह स्टार्टअप दर्ज हैं। दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित शोध व विकास और पेटेंट के मामले में राज्य अन्य प्रदेशों की तुलना में पिछड़ा है। रिपोर्ट में राज्य के लिए व्यापक इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाने और इस क्षेत्र में प्रोत्साहन बढ़ाने की सलाह भी दी गई है।
पहाड़ में ईवी चार्जिंग की चुनौती
उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच चार्जिंग व्यवस्था की स्थिति भी जरूरी हो गई है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में एक लाख वाहनों पर 9 चार्जर उपलब्ध होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में चार्जिंग व्यवस्था विकसित करने के लिए भी कहा गया है।
अक्षय ऊर्जा से बिजली उत्पादन का हिस्सा 24.5 फीसदी
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड की बिजली उत्पादन क्षमता में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी 24.5 फीसदी है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग व्यवस्था तैयार करने में बिजली उपलब्धता और अक्षय ऊर्जा की क्षमता को भी जरूरी माना गया है।
खरीद पर प्रोत्साहन व संचालन सहायता के आंकड़े शून्य
रिपोर्ट में उत्तराखंड के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीद को बढ़ावा देने, पुराने वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव और इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन में सहायता जैसे कई उपायों के सामने सर्वे के अनुसार कोई कार्य नहीं किया गया है। इसके विस्तार प्रचार-प्रचार के लिए भी पहल करने की सलाह दी गई है।