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Nainital News: मंत्री जी! हमारे मेडिकल कॉलेज का ‘इलाज’ करके तो जाते...आप यहां आए तो लेकिन सिस्टम की नब्ज देखे बिना ही लौट गए

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हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इलाज में लापरवाही हो या फिर स्वास्थ्य संसाधनों की कमी से मरीज-डॉक्टरों के बीच झड़प आम है। कभी डॉक्टरों के इस्तीफे तो कभी गुटबाजी के कारण चर्चाओं में रहने वाले एसटीएच में मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री पहुंचे जरूर लेकिन ‘अंदर ही अंदर’ बीमार चल रहे सिस्टम की नब्ज देखे बिना रस्म अदायगी कर लौट गए। मंत्री जी, अगर आप अपने ‘ खुफिया आले’ से अस्पताल की नब्ज टटोलते तो कार्रवाई न सही, व्यवस्थाओं में सुधार के कड़े निर्देश तो दे ही जाते। मंत्री जी जिम्मेदारी न सही जनहित में यहां की व्यवस्थाएं सुधारने के लिए समय जरूर निकालते। क्योंकि कुमाऊं के मरीज इसी अस्पताल पर निर्भर हैं यदि आप ही इसकी सुध नहीं लेंगे तो जनता कहां जाएगी।
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एसटीएच पर कई मौतों का आरोप जांच में न कार्रवाई न कोई दोषी

संवाद न्यूज एजेंसी
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में एक महीने के अंदर दो बच्चों की मौत हो चुकी है। दोनों मामलों में परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया है। एक मामले में स्वास्थ्य मंत्री ने पूछताछ कराने की बात कही है। कुछ सालों में ही लगे तमाम आरोपों पर जांचों के आदेश हुए लेकिन अधिकतर मामलों में मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड के मुताबिक कोई डॉक्टर दोषी साबित नहीं हुआ।

मेडिकल कॉलेज के अधीन सुशीला तिवारी अस्पताल में पूरे कुमाऊं से लोग इलाज की आस लेकर पहुंचते हैं। अस्पताल में अधिकतर गंभीर मरीजों को पहाड़ के जिलों से रेफर किया जाता है। यहां सात अक्तूबर को बागेश्वर के गरुड़ के कृष्णा की ऑपरेशन का इंतजार करते समय मौत हो गई। कृष्णा को ब्रेन हेमरेज हुआ था। परिजनों ने अस्पताल पर आरोप लगाया कि ट्राॅमा ओटी में जाने का इंतजार करते समय कृष्णा बात कर रहा था। ओटी के बाहर उसे करीब ढाई घंटे तक ऑपरेशन के लिए इंतजार कराया। इस बीच बच्चे ने प्राण त्याग दिए।
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इसी तरह से अस्पताल पर कई बार बच्चों के इलाज के मामलों में लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन हर बार सख्ती से जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कहता है। समय बीतने के साथ जांच सवाल, जवाब और कागजों के बीच उलझकर थम जाती है। अक्तूबर के मामलों में भी अस्पताल प्रबंधन ने जांच के बाद कार्रवाई की बात की है।



इन मामलों में लगे थे आरोप

- 07 अक्तूबर 2023 : बागेश्वर निवासी बच्चे की ऑपरेशन में देरी के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने ऑपरेशन में देरी का आरोप लगाया था। स्वास्थ्य मंत्री ने पूछताछ के लिए निर्देश दिए हैं।

- 04 अक्तूबर 2023 : आजाद नगर के बच्चे की मौत पर लोगों ने लापरवाही का आरोप लगा, एसटीएच में हंगामा किया था। इसमें परिजनों ने लिखित शिकायत नहीं की। अस्पताल प्रबंधन ने भी जांच नहीं कराई।

- 23 सितंबर 2022 : राजपुरा निवासी महिला ने प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में भर्ती हुई। परिजनों ने नवजात की मौत पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। मामले में प्राचार्य ने जांच की बात कही गई थी।

- 29 सितंबर 2021 : इलाज के दौरान किच्छा निवासी तीन साल के बच्चे की मौत हो गई। इलाज में लापरवाही का आरोप था।

- 18 सितंबर 2021 : रानीखेत निवासी दीपा को 15 सितंबर को प्रसव पीड़ा के बाद भर्ती कराया गया था। नवजात के दूध नहीं पीने की दिक्कत डॉक्टरों को बताई। बच्चे की मौत पर इलाज में देरी का आरोप लगा।

- 13 अगस्त 2018 : 13 से 15 अगस्त की शाम तक चार नवजातों की मौत हुई थी, डॉक्टरों पर लापरवाही और एनआईसीयू न मिलने का आरोप लगा।



कोट

मेडिकल जांचें बहुत कठिन होती हैं। पहले कई मामलों में कार्रवाई हुई है। संबंधित चिकित्सक, नर्स, टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय को चेतावनी, सस्पेंड, ट्रांस्फर, किया गया है। किसी की सेवाएं समाप्त जैसा निर्णय नहीं हुआ। कुछ मामले कोर्ट में भी हैं। बागेश्वर के कृष्णा की मौत के मामले में संबंधित विभागों से आख्या मांगी गई है। मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो, वह कितनी दूर से इलाज के लिए आए हैं यह संवेदना जरूरी है, इसको लेकर निर्देश दिए जाते रहे हैं। अस्पताल में मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
- डॉ. अरुण जोशी प्राचार्य मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी।





इमरजेंसी से सीनियर डॉक्टर गायब, अब कार्रवाई की तैयारी

माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। मेडिकल काॅलेज के अधीन सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज करने में सीनियर डाॅक्टर (पीजीजेआर-3) कतरा रहे हैं। यहां भर्ती होने वाले मरीजों को संबंधित डॉक्टर नहीं देख रहे हैं। यह बात खुद अस्पताल प्रबंधन मान रहा है, ऐसे में ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।


सुशीला तिवारी अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती की अलग-अलग व्यवस्था है। इसमें एक यूनिट में पीजीजेआर-1, पीजीजेआर-2 और पीजीजेआर-3 के अलावा फैकल्टी की तैनाती होती है। इमरजेंसी में कैज्युअल्टी मेडिकल ऑफिसर की भी तैनाती होती है। इन व्यवस्थाओं के बीच भी अस्पताल की सेवाओं को लेकर सवाल उठता रहता है। आरोप लगता था कि जूनियर डॉक्टर ही मरीजों का इलाज करते हैं, यह बात काफी हद तक साबित होती दिख रही है।

मेडिकल काॅलेज के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष ने एक पत्र जारी किया है, इसमें कहा गया है कि कैज्युअल्टी में पीजी जेआर-3 मौजूद नहीं रहते हैं। यहां पर भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने वाले मरीजों को देखा नहीं जाता है। यहां तक मरीजों के लिए कागजों से जुड़ा कार्य भी नहीं किया जा रहा है। यह घोर अनुशासनहीनता है। अगर कोई पीजीजेआर-3 कॉल के समय उपस्थित नहीं मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, कई बार फैकल्टी भी इलाज के लिए न पहुंचने की बात कही जाती रही है।
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