हल्द्वानी। कुमाऊं के हजरा साल के इतिहास को रेखांकित करते हुए यहां के में विभिन्न शासकों द्वारा समय-समय पर किए गए अत्याचारों, कुमाऊं के रीति रिवाज, ऐतिहासिक धरोहरों, पारंपरिक त्यौहार और संस्कृति पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘कथा कुमाऊं की’ सीडी का एक बैंक्वेट हॉल में विमोचन किया गया। विमोचन मुख्य अतिथि विधायक डॉ. इंदिरा हृदयेश, पद्मश्री यशोधर मठपाल ने किया। दर्शकों को डाक्यूमेंट्री दिखाई भी गई।
अस्तित्व नाट्य कला विकास समिति के बैनर तले ‘कथा कुमाऊं की’ सीडी में कुमाऊं के मूल निवासियों, कत्यूर वंश, चंद वंश, गोरखों और अंग्रेज शासकों द्वारा किए गए अत्याचारों को दर्शाया गया है। कुली बेगार प्रथा के खिलाफ कुमाऊं वासियों के व्यापक संघर्ष और त्याग का वर्णन किया गया है। उत्तराखंड आंदोलन, रामपुर तिराहा कांड, पहाड़ का जनजीवन, तीज त्योहार, धार्मिक पर्व, होली, दीपावली, रामलीला की कुमाऊंनी छटा पर आधारित डाक्यूमेंट्री देखकर दर्शक गद्गद हो गए।
विधायक डॉ. हृदयेश ने कहा कि अपने समाज, इतिहास और संस्कृति से लोगों को जानकारी देने, संस्कृति संरक्षण को प्रेरित करने के लिए विद्यालयों में भी यह सीडी दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने अस्तित्व नाट्य कला विकास समिति की सराहना भी की।
यूओयू के प्रो. गिरजा पांडे ने कुमाऊं के इतिहास की जानकारी दी।
इस दौरान संस्था के निदेशक हरीश चंद्र पांडे, सह निदेशक घनश्याम भट्ट (कुमाऊं का नाना पाटेकर), जगदीश जोशी, शंभू दत्त साहिल, लीला पांडे, प्रेमा पांडे, प्रो. प्रभु दत्त, नवीन वर्मा, एनसी तिवारी, मोहन बोरा, प्रो. मृगेश पांडे आदि थे। बता दें कि सात मार्च 2016 को पर्वतीय उत्थान मंच में ‘कथा कुमाऊं की’ नाटक का मंचन किया गया था। अब बाजार में इस पर आधारित डाक्यूमेंट्री भी उपलब्ध रहेगी। इस अवसर पर अमर उजाला के प्रतिनिधि ने घोषणा की कि इस डाक्यूमेंट्री के कुमाऊं के विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन का काम अमर उजाला करेगा।