रेलवे अपनी सेवाओं में सुधार से लेकर बुलेट ट्रेन जैसी महत्वाकांक्षी योजना का खाका खींच रहा है वहीं रेल महकमे के आंकड़े बताते हैं कि यात्रियों का रेल के प्रति क्रेज कम हो रहा है। यात्रियों की संख्या क्यों घटी है? इसका सटीक कारण रेलवे अधिकारियों के पास भी नहीं है। जबकि काठगोदाम से शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेन का संचालन किया जाता है।
काठगोदाम कुमाऊं का वीआईपी और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। यहां से लोग नैनीताल, रानीखेत समेत दूसरे पर्यटन स्थल को जाते हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण संस्थान होने के कारण भी सामान्य यात्रियों का आने का सिलसिला बने रहता है।
सैलानी और यात्रियों दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बाद भी यात्रियों की संख्या घटी है। 2015-16 वित्तीय वर्ष के अप्रैल में (53642), मई (64208), जून (72231), जुलाई (57404), अगस्त में 43783, सितंबर (46250), अक्तूबर (47567), नवंबर (55401) और दिसंबर (44772) के नौ महीनों में कुल 485258 यात्रियों ने यात्रा की थी। 2016-17 अप्रैल (50160), मई (58700), जून (56033), जुलाई (53542), अगस्त (43438), सितंबर (40484), अक्तूबर (48062), नवंबर (44136), दिसंबर (42742) कुल 437297 यात्रियों ने यात्रा की है।
इसके हिसाब से नौ महीने में ही 47 हजार 961 यात्रियों की संख्या कमी आई है। तुलनात्मक तौर पर हर महीने यात्रियों की संख्या घटी है। अगर इस आंकड़े और पिछले साल 2014-15 से तुलना करें, तो उसमें में कोई सुधार के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ने के संकेत नहीं है।
2014-2015 के शुरुआत नौ महीने को अगर 2015-16 से तुलना करें, तो चार महीने में यात्रियों की संख्या कम हुई थी। जो पांच महीने और हैं, उनमें भी बढ़ोतरी बहुत ज्यादा नहीं है। रेल अधिकारी भी कमी के सटीक कारणों को बता नहीं पा रहे हैं, एक कारण यात्रा किराए में बढ़ोतरी हो जाना है। इसके अलावा सड़क मार्ग को भी बेहतर होना भी कारण माना जा रहा है।
शताब्दी का आने-जाने का किराया अलग-अलग
रेलवे तरह-तरह के प्रयोग कर रहा है। इसमें शताब्दी का आने और जाने का किराया अलग है। यह अंतर 20 रुपए तक का है लेकिन यह अंतर क्यों है? इसका भी सटीक कारण रेल अधिकारियों को नहीं पता है। 20 रुपए के अंतर के पीछे एक कारण डायनेमिक्स किराये का बताया जा रहा है।