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एक जेई के हवाले शहर और देहात

Wed, 05 Aug 2015 01:51 AM IST
ब्यूूराे, अमर उजाला, हल्द्वानी।
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हल्द्वानी शहर का स्वरूप बेतरतीब निर्माण से बदसूरत हो गया है। निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए आज भी विनियमित प्राधिकारी दफ्तर है। इस दफ्तर का हाल बेहाल है। तीन कर्मचारियों के भरोसे दफ्तर चलता है। नक्शे स्वीकृत कराना सिर्फ औपचारिकता है। लोग मनमाने ढंग से निर्माण कराते हैं। व्यावसायिक भवनों में पार्किंग सुविधा तक नहीं है।
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हल्द्वानी कुमाऊं का सबसे बड़ा शहर है। विगत एक दशक में शहर का तेजी से विस्तार हुआ है। शहर से सटे गांवों की अस्तित्व खत्म हो चुका है। खाली जमीनें नहीं बची हैं। अधिकतर कालोनियों में बेधड़क दोमंजिला निर्माण हो रहे हैं। भवन निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए विनियमित प्राधिकारी कार्यालय है।

 यह कार्यालय 1982 से खुला है। तब हल्द्वानी एवं आसपास की आबादी बमुश्किल 50 हजार से अधिक नहीं होगी। करीब 34 सालों से हल्द्वानी शहर और देहात की आबादी बढ़कर चार लाख से अधिक पहुंच चुकी है। विनियमित प्राधिकारी दफ्तर का ढांचा दशकों पुराने ढर्रे पर है। इसमें मात्र तीन कर्मचारी हैं।
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विनियमित प्राधिकारी का अतिरिक्त दायित्व सिटी मजिस्ट्रेट के पास है। कार्यालय में एक जेई, एक बाबू और एक चपरासी है। शहर और शहर से सटे 56 गांवों में होने वाले निर्माणाधीन आवासीय और व्यावसायिक भवनों के नक्शे इसी दफ्तर से स्वीकृत होते हैं।

नियमानुसार भवन निर्माण एवं पुराने भवन का स्वरूप बदलने के लिए नक्शे स्वीकृत कराना एवं मानकों के अनुरूप निर्माण करना जरूरी है।

कार्यालय से प्रतिमाह मात्र 35 से 40 आवासीय और पांच से सात व्यावसायिक भवनों के नक्शे स्वीकृत होते हैं। इनमें भी जेई निरीक्षण नहीं कर पाते हैं। हल्द्वानी में 90 फीसदी भवनों का निर्माण बेतरतीब ढंग से हुआ है, जो शहर के लिए कोढ़ बन चुका है।
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