हल्द्वानी। तेंदुए के हमले में जान गंवाने वाली 60 वर्षीय पुष्पा का जीवन हमेशा संघर्षों से भरा रहा। कुछ समय पहले पति की मौत के बाद पुष्पा ने जवान बेटा भी खो दिया। अभी एक बेटे, बहू और दो पोते-पोती को पुष्पा सहारा दे रही थी लेकिन अब नियति ने पुष्पा को छीनकर पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया।
पुष्पा के पति मोहन सांगुड़ी बेस अस्पताल में चालक थे। कुछ समय पूर्व मोहन का देहांत हो गया। पति की मौत के बाद पुष्पा के कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई। पेंशन से परिवार का गुजर बसर कर रही पुष्पा पति की मौत से नहीं उभर पाई थी कि उसके जवान बेटे की मौत हो गई। पुष्पा अपने दूसरे बेटे कमल, बहू रंजना, पोते प्रियांशु और पोती मानवी के साथ रहती थी। बेटी पूजा शादी के बाद अपने ससुराल में रहती है। बेटा कमल कारपेंटरी का काम करता है लेकिन हर वक्त रोजगार न होने के कारण घर की माली हालत कमजोर रहती थी।
बेटियां बोली मां अब कभी मत जाना जंगल
पुष्पा पर तेंदुए के हमले की खबर सुनकर पुष्पा के साथ जंगल गई अन्य महिलाओं के परिजन भी गौला पुल पर जमा होकर उनका इंतजार करने लगे। हर किसी के मन में चिंता और डर भरा था। इसी दौरान पुष्पा के साथ गई लता और मुन्नी सकुशल जंगल से नीचे लौटे तो लता की बेटियां मां से लिपटकर रोने लगी। मां की चिंता में उनका बस यही कहना था मां तुम अब कभी जंगल मत जाना।
दहशत में थीं महिलाएं
पुष्पा के साथ जंगल में घास काट रही महिलाओं के मन में घटना को लेकर काफी दहशत थी। नंदी देवी और मुन्नी देवी ने बताया कि जंगल में पहुंचने के बाद सभी महिलाएं कुछ दूरी पर घास काटने लगी। अधिक दूरी न होने के कारण सब आपस में बात भी कर रही थी। इसी दौरान अचानक झाड़ी से निकला तेंदुआ पुष्पा पर झपटा और उसे घसीटते हुए ले गया। उसके बाद तेंदुआ कहां को भागा इसे देखने का उनमें साहस नहीं रहा।
महिलाओं को खोजने गया युवक भी घायल
महिलाओं की चीख पुकार सुनकर पुष्पा के पड़ोस में रहने वाला विक्की सांगुड़ी मदद करने जंगल की ओर भागा। जंगल जाने के लोग पगडंडी का सहारा लेते हैं। बरसात के कारण पूरे रास्ते में फिसलन भी रहती है। घबराया हुआ विक्की जब चिल्लाते हुए महिलाओं को खोज रहा था तो उसका पैर फिसला और विक्की गंभीर रुप से घायल हो गया। काठगोदाम थाना पुलिस ने विक्की को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया।
आश्रित को नौकरी देने की मांग
सोनकोट और गौला बैराज में दो महिलाओं की मौत के बाद ग्रामीणों का वन विभाग के प्रति आक्रोश था। ग्रामीणों का कहना था कि वन विभाग की लापरवाही से दो महिलाओं की मौत हुई है। अगर समय रहते वन विभाग ठोस कार्रवाई करता तो किसी की जान नहीं जाती। उन्होंन सोनकोट की मृतका भगवती और गौला बैराज की म़ृतका पुष्पा के पयिवार से एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है।
दो घंटे बाद नेपाली युवक पर झपटा तेंदुआ
जनता के बार-बार तेंदुआ देखे जाने की सूचना को वन विभाग गंभीरता से नहीं ले रहा था वहीं तेंदुआ एक के बाद एक लोगों का शिकार करने की तैयारी में था। पुष्पा को मारने के बाद भी लोगों ने गौला बैराज के जंगल में तेंदुए की आवाज सुनी। ग्रामीणों का कहना था कि इसके दो घंटे बाद तेंदुआ गुलाबघाटी दानीजाला क्षेत्र में काम कर रहे एक नेपाली युवक पर झपटा लेकिन युवक बच गया। शुक्रवार देर रात भी तेंदुए ने काठगोदाम क्षेत्र में एक गाय पर हमला कर उसे घायल किया था।
तेंदुए को पहले मार देते तो दादी जिंदा होती
जंगल से लाने के बाद वन विभाग और पुलिस कर्मी कुछ देर के लिए पुष्पा के शव को घर पर लाए इस दौरान जहां लोगों में चीख- पुकार मच गई वहीं घटना से आक्रोशित हर कोई बस एक ही मांग कर रहा था कि तेंदुए को मारा जाए। पुष्पा के पोते प्रियांशु और पोती मानवी बस दादी को पुकार रहे थे तो बहू रंजना सास के शव से लिपटकर वापस आने की जिद कर रही थी। प्रियांशु बोला तुम तो बाघ को मार दोगे पर मैं अब दादी कहां से लाऊंगा। पहले मार देते तो दादी जिंदा होती।
सोनकोट गांव में एक बार फिर मातम
तेंदुए के हमले से गौला बैराज के फिर सोनकोट गांव में भी मातम छा गया। 23 जून को तेंदुए ने सोनकोट गांव में भगवती नाम की महिला को मारा था। शनिवार को तेंदुए का शिकार बनी पुष्पा का मायका भी इसी गांव में है। भगवती के जाने का दर्द और तेंदुए का डर अभी लोगों के मन से गया नहीं था कि अब पुष्पा को खोकर सोनकोट गांव एक बार फिर दर्द और दहशत में डूब गया।
लोगों में गुस्सा
- गौला बैराज निवासी विजय का कहना था कि वन विभाग की लापरवाही से एक के बाद एक हादसे हुए हैं। वन विभाग अगर समय रहते गंभीरता से कार्रवाई करता तो किसी की जान नहीं जाती। तत्काल तेंदुए को मारना चाहिए।
- सोनकोट निवासी मुन्नी देवी का कहना था कि तेंदुए की दहशत गांव में लंबे समय से है कई बार तेंदुआ उनके घरों तक आ जाता है लेकिन वन विभाग सिर्फ मौका मुआयना करने के सिवा और कोई कार्रवाई नहीं करता।
- गौला बैराज निवासी नंदी देवी का कहना था कि मवेशियों से भी गांव के लोगों को रोजगार मिलता है। जंगल में खतरा रहता ही है लेकिन गांव के आसपास भी तेंदुए से सुरक्षा के कोई इंतजाम वन विभाग ने नहीं किए हैं।
- गौला बैराज की ही मुन्नी देवी का कहना है कि तेंदुए की डर से लोगों ने शाम के समय घरों से बाहर जाना छोड़ दिया है। गौला बैराज में बाहर के लोग भी घूमने आते हैं। वन विभाग को यहां रोजाना गश्त करनी चाहिए।