नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया (नासी) और कुविवि के सहयोग से यहां कुविवि के हरमिटेज भवन में तीन दिवसीय विज्ञान कार्यशाला शुक्रवार से शुरू हो गई है। इसका विषय साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंस्टाइजेशन फॉर उत्तराखंड है। इसमें विज्ञान एवं तकनीक के प्रति जनजागरूकता को जरूरी बताया गया।
कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर कुविवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने कुविवि में पहली बार इस तरह की राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान कार्यशाला आयोजित करने पर नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया का आभार जताया और कहा कि इस कार्यशाला में मौजूद वैज्ञानिकों, शोधार्थियों के अनुभवों का लाभ कुविवि के विद्यार्थियों को मिलेगा। उन्होंने कुमाऊं के प्रमुख वैज्ञानिकों और अन्य प्रतिभाओं द्वारा इस क्षेत्र में दिए गए योगदान के बारे में भी बताया।
यूकोस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेद्र डोभाल, नासी के चेयरपर्सन प्रो. मधु शर्मा, दिल्ली विवि की प्रो. परमजीत खुराना, नासी के सचिव प्रो. नीरज कुमार ने विज्ञान एवं तकनीकी के प्रति जागरूकता पर व्याख्यान दिए। पद्मभूषण प्रो. केएस वाल्दिया, पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह, भूगर्भशास्त्री प्रो. सीसी पंत, प्रो. एके शर्मा आदि ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने उत्तराखंड में विज्ञान एवं तकनीक के प्रति जनता में जागरूकता, साक्षरता की स्थिति पर चर्चा की।
कार्यशाला के संयोजक प्रो. राजीव उपाध्याय, प्रो. एसएस बर्गली हैं। इस दौरान परिसर निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता, प्रो. बीएल साह, प्रो. नीरजा टंडन, प्रो. जीके शर्मा, प्रो. एलएस लोधियाल, डॉ. रितेश साह, डॉ. किरन बर्गली आदि थे। कार्यशाला में कुविवि के विज्ञान संकाय के सभी विभागों के शिक्षक, छात्र-छात्राओं समेत विभिन्न संस्थानों के 18 से अधिक वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं।