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नए कुलपति को पूर्व कुलपति के अध्यादेश को पलटने की कोशिश पड़ी भारी

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सेमेस्टर प्रणाली में अचानक बदलाव पड़ा भारी
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हल्द्वानी।
आईआईटी के अपने अनुभव के आधार सेमेस्टर प्रणाली में बदलाव ही कुमाऊं विश्वविद्यालय के मौजूदा कुलपति प्रोफेसर डीके नौड़ियाल पर भारी पड़ा। नौड़ियाल की कोशिश सुधार की रही होगी, लेकिन जल्दबाजी कहें या सही समय का चुनाव न करना ही वजह रहा कि विश्वविद्यालय को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।

हालांकि कुछ लोग इस सारे मामले को विश्वविद्यालय की अंदरूनी खींचतान से भी जोड़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय के पूर्व के अध्यादेश को बदलने से अचानक ढेरों छात्रों के फेल हो जाने से छात्र आंदोलित हो गए थे। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने स्नातक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली सत्र 2016-17 से लागू की थी।
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विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने कमेटी की संस्तुति पर स्नातक सेमेस्टर प्रणाली के लिए जो अध्यादेश (ऑर्डिनेंस) लागू किया था, उसमें प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को द्वितीय सेमेस्टर में प्रमोट करने की व्यवस्था थी। यानी कि बीए, बीएससी या फिर बीकॉम प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी अगर सभी प्रश्नपत्रों में भी फेल होंगे तब भी उन्हें द्वितीय सेमेस्टर में प्रमोट कर दिया जाएगा।

द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में विद्यार्थियों को उदाहरण स्वरूप बीएससी के छात्र को प्रथम सेमेस्टर, द्वितीय सेमेस्टर के कुल 18 पेपरों में से कम से कम नौ पेपर में परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। अन्यथा वे छात्र जो कम पेपर में उत्तीर्ण होगा, उसे सेमेस्टर बैक में पुन: प्रथम सेमेस्टर में लौटना पड़ेगा।

अध्यादेश के यही नियम कायदे पिछले वर्ष जुलाई में प्रवेश के बाद कुमाऊं विवि ने अपने परीक्षा फार्म के प्रकाशित किए गए थे। कुलपति प्रो. धामी का पहली नवंबर को कार्यकाल समाप्त हो गया। इसके बाद करीब चार माह तक उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कुमाऊं विवि के कुलपति का कार्यभार अतिरिक्त रूप से संभाला लेकिन उन्होंने पूर्व कुलपति प्रो. धामी के फैसलों में कोई बदलाव नहीं किया।

दो माह पूर्व आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डीके नौड़ियाल को कुमाऊं विवि का कुलपति बनाया गया। इस बीच स्नातक प्रथम सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम प्रश्नपत्रों में अंक देने का फार्मूला फंसा। कुलपति प्रो. नौड़ियाल ने कुछ सलाहकारों की राय पर पूर्व कुलपति प्रो. धामी के अध्यादेश में ही बदलाव कर नया अध्यादेश लागू कर दिया।
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परीक्षा के बाद लागू किए गए नए अध्यादेश से बीएससी के हजारों छात्र फेल हो गए। बताते हैं कि स्नातक सेमेस्टर प्रणाली के अध्यादेश को तत्कालीन कुलपति प्रो. धामी ने विद्या परिषद से मंजूर नहीं कराया था और मौजूदा कुलपति प्रो. नौड़ियाल ने भी बिना स्वीकृति के अपने अध्यादेश को लागू करवा दिया। छात्रों का आंदोलन भड़का तो कुलपति को पुराने छात्रों के मामले में रोल बैक करना पड़ा और विद्या परिषद के जरिए भी नए अध्यादेश पर मुहर लगवानी पड़ी।

- कुमाऊं विश्वविद्यालय में आईआईटी की व्यवस्था लागू करना सुधार की कोशिश, पर समय गलत
- बैक फुट पर आना पड़ा विश्वविद्यालय को
- विद्या परिषद में फिर भी कुछ हद तक अपनी बात मनवा ले गए कुलपति
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