हल्द्वानी। ऑटो इंडस्ट्री के मौजूदा हालात को देखकर भले ही कुछ चुनौतियां नजर आ रही हों लेकिन ऑटो इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि पहली नजर में ऑटो उद्योग को मंदी से जोड़कर कुछ भ्रम की स्थिति भी बना दी गई है। ग्राहक बीएस-6 वाहनों का इंतजार कर रहे हैं जबकि बीएस-4 वाहनों को खरीदने पर उनको कई प्रकार के लाभ होने हैं।
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2020 से बीएस-6 वाहन ही पंजीकृत करने का एलान किया है। यह तो लोगों को पता है लेकिन साथ ही सरकार ने ये घोषणा भी की है कि 31 मार्च 2020 से पहले खरीदे गए वाहन भी रजिस्ट्रेशन की पूरी अवधि तक चलेंगे। यानी जो लोग यह समझ रहे हैं कि अभी बीएस-4 वाहन खरीद लें तो वह आने वाले अप्रैल से अमान्य हो जाएगा तो यह गलत है।
बीएस-4 वाहन की वैधता 31 मार्च के बाद भी उतनी ही रहेगी जितनी बीएस-6 वाहन की होगी। 31 मार्च के बाद बाजार में आने वाली बीएस- 6 गाड़ी की कीमतों में सात से 10 प्रतिशत बढ़ोतरी होने के भी आसार हैं। जबकि बीएस-4 वाहनों की खरीद पर ऑटो उद्यमियों द्वारा कई तरह की छूट दी गई हैं। बीएस-4 वाहन के मुकाबले बीएस-6 वाहन महंगे भी होंगे। बीएस-4 में मामूली तकनीकी बदलाव (कन्वर्टर लगाने) के बाद बीएस-6 का फ्यूल इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे इंजन में किसी तरह की खराबी नहीं होगी।
जबकि बीएस-6 में बीएस- 4 का फ्यूल इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, इससे इंजन खराब होने की संभावना है। बीएस-4 वाहन खरीदने वालों को भविष्य में भी किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी। बस ग्राहकों को बीएस-4 और बीएस- 6 वाहनों के बीच अंतर को समझने की आवश्यकता है।