हल्द्वानी। ऑटो इंडस्ट्री में किसी तरह की मंदी नहीं है यह महज एक स्लो डाउन है जो बाजार की एक सतत प्रक्रिया है और आती-जाती रहती है। कार के शौकीन ग्राहकों को कार खरीदने के लिए जहां बैंक पूरी सुविधाएं दे रहे हैं वहीं सरकार ने भी टैक्स की दरों में काफी रियायत दी है। ऑटो उद्यमियों ने भी कई तरह की छूट वाहन खरीद पर दी है। यानी, वाहन खरीदने का यह सबसे बेहतर समय है। अमर उजाला की ओर से शनिवार को आयोजित समृद्धि संवाद में ऑटो इंडस्ट्री के विशेषज्ञों ने ये बातें कहीं।
ऑटो व्यापार के विशेषज्ञों का कहना था कि बाजार में किसी भी तरह की मंदी आने पर सबसे पहले रियल स्टेट के कारोबार पर इसका असर पड़ता है। फिलहाल रियल स्टेट में भी मंदी नहीं स्लोडाउन है। ऐसे में दूसरे नंबर पर आने वाली ऑटो इंडस्ट्री में मंदी की बात महज एक भ्रम है।
बाजार का उतार-चढ़ाव पूरी तरह से डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। डिमांड रुकी नहीं है बल्कि कुछ कारणों से कम हुई है। इससे गाड़ियों के होलसेल कारोबार पर कुछ प्रभाव पड़ा है लेकिन रिटेल बाजार इससे प्रभावित नहीं है। लोग नियमित रूप से गाड़ियों की खरीदारी कर रहे हैं। त्योहारी सीजन में बाजार और उठेगा। ऑटो कारोबारी वाहनों की खरीद पर कई तरह की छूट दे रहे हैं।
त्योहारी सीजन में हर वर्ष की तरह इस बार भी अच्छीखासी छूट दी जाएगी। बैंकों ने भी वाहन लोन को लचीला बनाया है। ब्याज दरें कुछ कम हुई हैं तो शर्तें भी आसान हुई हैं। ग्राहकों के लिए मौके का फायदा उठाने का यह अनुकूल समय है।
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बीएस 4 और बीएस 6 गाड़ियों को लेकर बाजार में भ्रम की स्थिति है। बीएस 4 गाड़ी बेहतरीन है क्योंकि बीएस 4 में मामूली तब्दीली के बाद बीएस 6 का फ्यूल भी इस्तेमाल किया जा सकता है जबकि बीएस 6 में बीएस 4 का फ्यूल इस्तेमाल नहीं होगा। - विक्रम सिंह, सीएमडी करन अशोक फर्म।
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ऑटो इंडस्ट्री में किसी तरह की मंदी नहीं है, बस बाजार में कुछ भ्रम की स्थिति और ग्राहकों में जागरूकता के अभाव में मंदी की चर्चा है। मार्केट में ग्रोथ अपेक्षा से कुछ कम है लेकिन इसका कारण आर्थिक मंदी नहीं है। ऑटो सेक्टर में कई तरह के बदलाव आ रहे हैं। - विजय चौहान, श्री बालाजी एजेंसी
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टैक्स में छूट एक अच्छी पहल है। टैक्स के बचे पैसे को ग्राहक अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए खर्च कर सकता है। ऑटो इंडस्ट्री के बाजार में खरीदारों की कमी है जो कुछ हद तक बाजार को प्रभावित कर रही है लेकिन यह बाजार में किसी तरह की मंदी का संकेत नहीं है। - नंदन सिंह रावत, जनरल मैनेजर पाल फोर्ड।
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ऑटो सेक्टर में मंदी का मतलब यह नहीं कि गाड़ी खरीदने वालों की संख्या में कमी आई है। लोग गाड़ियां अब भी खरीद रहे हैं और सेकेंड हेंड गाड़ियां बेची भी जा रही हैं जिससे मंदी की मार जैसा कोई सवाल बाजार में नहीं है। -भूपेश अग्रवाल, एमडी नैनीताल मोटर्स
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ग्राहक शोरूम में गाड़ी की डिमांड कर रहे हैं और गाड़ियों की बिक्री भी हो रही है। आने वाले त्योहार पर खरीदार फिर बाजार में रौनक लाऐंगे और बाजार ऊंचाई पर जाएगा। मंदी जैसे कोई आसार बाजार में नहीं हैं। - संजय कुमार गोलू, बजरंग मोटर्स।
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वाहनों के खरीदार सोशल मीडिया के जरिये रुचि ले रहे हैं। गाड़ी की लॉचिंग के समय ही उनकी डिमांड भी आ रही है। युवावर्ग गाड़ियों के फीचर्स, उसकी कीमत, सुविधाएं आदि की जांच पड़ताल कर रहा है। ऑटो इंडस्ट्री में किसी भी तरह के बदलाव के लिए युवा तैयार है। - अमित साहनी, एमडी अमित ऑटो
यह बोले बैंकर्स
बैंकों में ग्राहकों के लिए पूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऑटो इंडस्ट्री में वर्तमान समय में ग्राहकों के लिए कई तरह की छूट हैं। हर बार त्योहारी सीजन में अतिरिक्त छूट भी दी जाती है। मंदी जैसे हालात बाजार में नहीं हैं इसलिए कार के शौकीन बेझिझक वाहनों की खरीद कर सकते हैं। - अशोक लोहमोड़, रीजनल मैनेजर, एसबीआई।
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बैंक कम दरों पर ग्राहकों को लोन की सुविधा दे रहे हैं। बाजार को लेकर नीतियों में जल्द-जल्द बदलाव से बाजार में असमंजस का भाव आया है। बाजार के लिए बीस सूत्री या पंचवर्षीय योजनाओं की तरह पॉलिसी तैयार होनी चाहिए। - पराग जैन, सीएम पीएनबी
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ऑटो सेक्टर में सबसे पहले बिक्री में कमी की बात कही जा रही है लेकिन अन्य सेक्टरों में भी आई कमी को मंदी से नहीं जोड़ा जा रहा है। इसके चलते ऑटो इंडस्ट्री में भी मंदी की मार पूरी तरह से मिथ्या तथ्य है। - सरोज कुमार एजीएम, पीएनबी
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बाजार के विशेषज्ञों को चाहिए कि वह सामने आकर लोगों के सामने सही तथ्य रखें। देखा जाए तो बाजार में वाहनों की बिक्री में कमी जैसा कुछ नहीं दिखता है। बाजार में किसी भी तरह की लिक्विडिटी की कमी से निपटा जा सकता है। - जीपी सिंह, पीएनबी
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ऑटो सेक्टर सबसे पहले लोगों की नजर में आता है। बैंकों ने लोन में पूरी सुविधाएं दी हैं जिससे ऑटो इंडस्ट्री में मंदी का असर जल्दी नहीं हो सकता। फिलहाल सस्ती गाड़ियां खरीदने वाले ग्राहक अपनी योजनाएं टाल रहे हैं। मंदी जैसे हालात नजर नहीं आ रहे हैं। - अभिनव श्रीवास्तव, सीएम बीओबी
--- सीए बोले
सड़कों पर रोज नई गाड़ियां, मंदी कहां
भारतीय बाजार में अगर मंदी की बात करें तो वर्ष 2008 में मंदी का दौर था जो 2011 तक रहा लेकिन तब भी अर्थव्यवस्था पर काफी हद तक असर नहीं पड़ा था। अभी एक तरफ ऑटो इंडस्ट्री में मंदी की बात कही जा रही है वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर रोजाना नई गाड़ियां आ रही हैं। - प्रशांत कक्कड़ सीए।
--- अर्थशास्त्रियों की राय
मंदी नहीं, स्लो डाउन है
देश में मंदी नहीं है यह एक तरह का स्लो डाउन है जो बाजार की एक सतत प्रक्रिया है और आती-जाती रहती है। सरकार की तरफ से टेक्स में रियायत कर लोगों को राहत भी पहुंचाई गई है। कुछ लोग श्राद्ध पक्ष में खरीदारी नहीं करने के विचार को लेकर बाजार का रुख नहीं कर रहे हैं। -प्रो. आर सी मिश्रा, यूओयू।
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बाजार ग्रोथ कर रहा, बस अपेक्षा से कुछ कम है
बाजार ग्रोथ कर रहा है बस अपेक्षा से कुछ कम है। ऑटो सेक्टर में तथाकथित मंदी की बात चल रही है, जिससे ज्यादातर ग्राहकों ने अपनी खरीदारी की योजना टाल दी है जिससे बाजार में कुछ सन्नाटा सा महसूस हो रहा है लेकिन मंदी की कोई बात नहीं है। त्योहारी सीजन आ रहा है। हमारे देश में त्योहारों में बाजार उठने की सनातन परंपरा रही है। इस बार भी बाजार गुलजार रहने की उम्मीद है। -डॉ. ऋत्विक दुबे, निदेशक आम्रपाली संस्थान।