रुद्रपुर। तीन कृषि कानूनों को खत्म करने को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के चर्चित चेहरे और भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने किसानों में जोश भरते हुए उन्हें आगाह किया कि घर में बैठने से नहीं, जगाने से ही सरकार जागेगी। एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर उतरकर हमें अपनी एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन का एहसास कराना होगा। वे शनिवार को आवास विकास गुरुद्वारे में तराई के किसानों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
बैठक में चढूनी ने कहा कि तराई के किसानों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में एकजुटता का जो परिचय दिया है, वह काबिले तारीफ है। आंदोलन को एक बार फिर तेज करना पड़ेगा। सरकार अपनी जिद पर अड़ी है तो किसान भी अपनी मांग के लिए अड़े रहेंगे। सरकार किसानों पर जबरन तीन नए कृषि कानून थोपकर उत्पीड़न करना चाहती है।
सही समय आने पर सरकार को जवाब दिया जाएगा। किसान कृषि कानून के पक्ष में नहीं है तो सरकार को इस पर जल्द विचार कर इन्हें वापस लेना चाहिए। कार्यक्रम में जिले के सभी ब्लॉकों के अलावा यूपी के बहेड़ी और बिलासपुर से भी किसान पहुंचे थे। वहां पर गुरवीर सिंह विर्क, विक्रमजीत सिंह, सुखमुख सिंह, गुरसेवक सिंह, निर्मल सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
चुनाव से मतलब नहीं लेकिन किसानों की सुने सरकार
रुद्रपुर। भारतीय किसान यूनियन चढूनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि 2022 में उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से उन्हें कोई मतलब नहीं है और न ही वे राजनीति करना चाहते हैं। सरकार आंदोलनरत किसानों की मांग पूरी करे। किसानों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार तीन नए कृषि कानून वापस नहीं ले लेती।
शनिवार को रुद्रपुर पहुंचने पर पत्रकारों से मुखातिब चढूनी ने बताया कि देशभर का किसान नए कृषि कानूनों को वापस करने की मांग पर दिल्ली की सड़कों पर हैं। सरकार आठ महीने बाद भी किसानों की बात नहीं सुन रही। आंदोलन का हिस्सा बने कई किसानों के खेत बंजर पड़े हैं। किसानों ने भी ठान लिया है कि उनकी मांग पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि कुछ लोग आंदोलन को राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। वह साफ कर देना चाहते हैं कि आंदोलन का चुनाव से कोई लेना देना नहीं है। किसान चुनाव को छोड़कर अपनी मांग पूरी करने के लिए मुखर हैं। समय आने पर आर-पार की लड़ाई से भी पीछे नहीं हटा जाएगा। अमेरिका की तर्ज पर सरकार ये कानून लेकर आई है लेकिन अमेरिका की स्थिति और भारत की स्थिति में रातदिन का फर्क है।
गुरसेवक प्रदेश अध्यक्ष और विक्रमजीत बने उपाध्यक्ष
रुद्रपुर। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) की बैठक के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने प्रदेश में संगठन का गठन किया। इसमें गुरसेवक सिंह मोहार को प्रदेश अध्यक्ष, विक्रमजीत सिंह को उपाध्यक्ष और नवनीत चौहान को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।
साहब सिंह बिज्टी को प्रदेश सलाहकार, रिजवान अहमद को जिला महासचिव, साहब सिंह को जिलाध्यक्ष, दीपक बड़ाल व सक्कतर सिंह को जिला सचिव, गुरचरन सिंह जिला अध्यक्ष रामपुर, मनजिंदर सिंह भुल्लर को ब्लॉक अध्यक्ष, हरजिंदर सिंह को युवा मिशन यूनियन का अध्यक्ष, अजविंदर सिंह को युवा जिला उपाध्यक्ष, मनदीप सिंह को युवा जिला सचिव, जितेंद्र सिंह को युवा ब्लॉक अध्यक्ष सितारगंज, अमरेंदर सिंह लाडी को युवा ब्लॉक अध्यक्ष किच्छा, गुरवीर सिंह विर्क को युवा जिलाध्यक्ष रामपुर व हरदीप सिंह को युवा ब्लॉक अध्यक्ष बिलासपुर बनाया गया।
तराई में किसानों का चौथा संगठन, भाकियू का तीसरा गुट
रुद्रपुर। कृषि कानूनों को लेकर चल रहे आंदोलन में तराई के किसानों की अच्छी भागीदारी है। इसको देखते हुए भाकियू का तीसरा संगठन अस्तित्व में आया है। अभी तराई में भाकियू (टिकैत), भाकियू (भानु गुट) सक्रिय है। अब भाकियू (चढूनी) भी विस्तार हो गया है। तराई किसान संगठन भी किसानों की आवाज बुलंद करता रहता है। कुल मिलाकर किसान एक संगठन के बजाए अब चार संगठनों में बंटे हुए हैं।
- सरकार किसानों की मांग को गंभीरता से नहीं ले रही है। किसानों के अधिकारों को नया कृषि कानून लागू कर छीनने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार को अपना निर्णय वापस लेना चाहिए।- हरदीप सिंह, अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) रामपुर
- किसान पिछले आठ माह से आंदोलन पर हैं। अपनी मांग के लिए उत्तराखंड ही नहीं कई अन्य राज्यों के किसानों ने अपनी जान दे दी है। सरकार को नया कृषि कानून वापस लेकर किसान आंदोलन को समाप्त करना चाहिए। -साहब सिंह, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (चढूनी)
- किसान के सब्र की सरकार परीक्षा ले रही है। नए कृषि कानून को लागू कर सरकार हजारों किसानों को नुकसान पहुंचा रही है। यह कृषि कानून किसानों के हकों पर डाका डालने वाला है।- मनवीर सिंह, किसान।
- कृषि कानून कहीं तक किसानों के हित में नहीं है। लोगों को गुमराह कर सरकार इसे लाभकारी बता रही है। कृषि कानून वापस न लेने तक आंदोलन जारी रहेगा।- राजेंद्र सिंह, किसान।