रामनगर। कभी घटती बाघों की संख्या को लेकर चिंता का केंद्र रहा कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) आज देश में वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है। यहां घनत्व के मामले में सबसे अधिक बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई है। सीटीआर में शुरू हुए प्रोजेक्ट टाइगर के तहत यहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई जिससे बाघों साथ ही अन्य वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हुआ है।
सीटीआर अधिकारियों के मुताबिक प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत देश में तेजी से घट रही बाघों की संख्या बचाने के लिए की गई थी। इसकी शुरुआत कॉर्बेट से की गई। इस योजना के लागू होने के बाद गश्त बढ़ाई गई। शिकार पर प्रभावी रोक, निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। इन प्रयासों के चलते आज कॉर्बेट में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अन्य वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के साथ जंगलों के संरक्षण से जैव विविधता मजबूत हुई है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास भी सुरक्षित हो रहे हैं।
20 वर्ष से लगातार बढ़ रही बाघों की संख्या
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के आंकड़ों के मुताबिक सीटीआर में 2006 में 206, 2010 में 214, 2014 में 215, 2018 में 231 और वर्ष 2022 में 260 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। एनटीसीए हर चार साल में बाघों की गणना करता है।
इतनी है अन्य वन्यजीवों की आबादी
रामनगर में बाघ के साथ ही हाथी, पक्षी, हॉग डियर समेत जलीय जंतुओं की गणना भी समय-समय पर की जाती है। मौजूदा गणना के अनुसार यहां 1,226 हाथी, 197 मगरमच्छ, 183 घड़ियाल, 161 ऊदबिलाव, पक्षियों की 402 प्रजातियां और 189 हॉग डियर दर्ज किए गए हैं।
प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत आने वाले बजट से बाघों की निगरानी के लिए आधुनिक उपकरणों का प्रयोग, दैनिक कर्मियों की तैनाती समेत अन्य कार्य किए जा रहे हैं। संरक्षण के इन कार्यों की मदद से बाघों के साथ-साथ वनों और अन्य वन्यजीव भी संरक्षित हो रहे हैं।
- डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर