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आयुर्वेद छात्रों को सर्जरी की अनुमति के विरोध में बंद रहे पिथौरागढ़ के निजी अस्पताल

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पिथौरागढ़ में बंद पड़ा प्राइवेट अस्पताल। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। आयुर्वेद छात्रों को सर्जरी करने की अनुमति मिलने के फैसले पर एलोपैथी डॉक्टर शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। प्राइवेट अस्पताल पूरी तरह से बंद रहे। इन अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं भी ठप रही।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर पिथौरागढ़ जिले में भी सभी प्राइवेट अस्पताल बंद रहे। जिला मुख्यालय सहित धारचूला, डीडीहाट, मुनस्यारी सहित अन्य स्थानों में स्थित लगभग 20 से अधिक अस्पताल और क्लीनिकों में मरीज नहीं देखे गए। सुबह छह बजे से लेकर शाम छह बजे से ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से बंद रही। इसके चलते मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अस्पतालों के बंद होने से कुछ मरीजों ने सरकारी अस्पतालों का रुख किया। हालांकि निजी अस्पतालों के बंद रहने से जिला मुख्यालय के पुरुष और महिला अस्पतालों में मरीजों की भीड़ नहीं रही। अन्य दिनों की तरह ही सामान्य रूप से सरकारी अस्पतालों में मरीज पहुंचे। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डा.जेसी गड़कोटी ने बताया कि आयुर्वेद छात्रों को सर्जरी करने की अनुमति देने के विरोध में आईएमए का बंद पूरी तरह से सफल रहा।
सर्जरी आयुर्वेद की देन, आईएमए का विरोध निंदनीय : डॉ.उपाध्याय
पिथौरागढ़। आयुर्वेद अनुसंधान विशेषज्ञ डॉ. अवनीश उपाध्याय ने आईएमए के विरोध जताने को अति निंदनीय एवं दुर्भाग्य पूर्ण बताया है। डा.उपाध्याय का कहना है कि इससे आईएमए का आयुर्वेद विरोधी मानसिकता का पता चलता है। ऐसे विरोध प्रदर्शन से आईएमए रोगियों के लिए जहर का काम कर रही है। उन्होंने कहा है कि महर्षि चरक एवं सुश्रुत दोनों ही आयुर्वेद के चिकित्सक हैं। महर्षि चरक काय चिकित्सक (फिजिशियन) एवं सुश्रुत शल्य कर्म (सर्जन) के विषय के ज्ञाता है, जिन्हें फादर ऑफ सर्जन एंड प्लास्टिक सर्जन आज भी माना जाता है। इसे एलोपैथ चिकित्सक अपनी पैथी में जोड़ कर देखते हैं, जबकि सर्जरी एक प्रकार की तकनीक है। आयुर्वेद में सर्जरी पांच हजार वर्ष पुरानी है। आयुर्वेद चिकित्सक आज भी दुर्गम, अतिदुर्गम गांव में विषम परिस्थितियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आईएमए को अब इस संकीर्ण आयुर्वेद विरोधी मानसिकता को छोड़ देना चाहिए। ब्यूरो
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हड़ताल से दूर रहे डॉक्टर, आम दिनों की तरह चली ओपीडी
चंपावत। आयुर्वेद छात्रों को सर्जरी करने की इजाजत दिए जाने के विरोध में प्रदेश में कई जगह हड़ताल रही, लेकिन चंपावत जिले में इसका कोई असर नहीं रहा। सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी जारी रही। प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. एचएस ऐरी ने कहा कि आम दिनों की तरह सरकारी अस्पतालों में आकस्मिक सेवा और ओपीडी जारी रही। इसी तरह निजी अस्पतालों में भी इलाज जारी रहा। ब्यूरो
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