अव्यवस्थाओं का पर्याय बन चुके सुशीला तिवारी अस्पताल में मंगलवार को मंडलायुक्त डी सैंथिल पांडियन ने छापा मारा। मंडलायुक्त के छापे से एसटीएच में हड़कंप मच गया। मंडलायुक्त को खराब मशीनों के अलावा वार्ड तक में खामियां मिली। मंडलायुक्त ने प्रिंसिपल को चेेतावनी दी अगर व्यवस्थाओं में सुधार न हुआ तो बदल दूंगा।
मंडलायुक्त पांडियन मंगलवार को लगभग सवा ग्यारह बजे सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले ओपीडी काउंटर, मेडिसिन ओपीडी और सर्जरी ओपीडी में छापा मारा। ओपीडी काउंटर में पर्चा बनने में देरी को लेकर नाराजगी जताई। मेडिसिन ओपीडी में आए मरीजों से पूछा कि दवाएं अस्पताल से मिलती हैं या नहीं।
मरीजों का जवाब न में मिलने पर चिकित्सा-शिक्षा निदेशक डा. आशुतोष स्याना और प्राचार्य डा. सीपी भैसोड़ा से पूछा कि दवाएं अस्पताल से क्यों नहीं दी जाती हैं। एनएचएम के तहत दवाएं अस्पताल से मिलनी चाहिए। इसके बाद रेडियालाजी विभाग में गए। दो माह से खराब पड़ी मेमोग्राफी मशीन पर नाराजगी जताई। कहा कि 15 दिन में मेमोग्राफी मशीन ठीक हो जानी चाहिए अन्यथा कार्रवाई होगी।
उन्होंने पुरानी हो चुकी एमआरआई मशीन को बदलकर नई मशीन खरीदने के लिए प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही ईको मशीन भी शीघ्र खरीदने के लिए टेंडर करने की बात कही। कहा कि वित्त विभाग से ईको मशीन खरीद के लिए शीघ्र स्वीकृति दिला दी जाएगी। उन्होंने सीटी स्कैन मशीन देखी और कहा कि मशीनों की सीएमसी (कंप्रेंसिव मेंटीनेंस कांट्रेक्ट) करा लें।
मंडलायुक्त छठें माले पर बने बर्न आईसीयू में भी गए और व्यवस्थाएं देखी। बर्न विभाग के एचओडी डा. हिमांशु सक्सेना के दस दिन के अवकाश पर होने पर नाराजगी जताई और पूछा कि किसने इतना लंबा अवकाश दिया।
पांडियन ने कैंटीन का भी निरीक्षण किया। कैंटीन में शेड बनाने के आदेश दिए। इसके बाद गायनी वार्ड, डेंगू वार्ड की भी व्यवस्थाएं देखी। उन्होंने मीटिंग हाल में एसटीएच प्रशासन के साथ बैठक की और पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान एसडीएम एपी बाजपेई, पीआरओ आलोक उप्रेती आदि थे।
हाथ में ब्लड सैंपल लिए वृद्धा ने की शिकायत
एसटीएच में ब्लड जांच की रिपोर्ट गायब होना कोई नई बात नहीं है। मंगलवार को हद तो तब हो गई जब एक वृद्धा को उसके बेटे का ब्लड सैंपल से भरी सीरिंज देकर लैब में ले जाने को कहा गया। मंडलायुक्त के अस्पताल में मौजूद होने के बावजूद भी एसटीएच कर्मियों ने अपनी कार्यशैली में बदलाव नहीं किया।
कैंटीन में मौजूद मंडलायुक्त डी सैंथिल पांडियन के पास गंगा देवी पहुंच गई और बताया कि बेटा भर्ती है और खून की जांच होनी है। खून निकालकर सीरिंज पकड़ा दी है कि लैब में देकर आओ। पांडियन ने इस कार्यशैली पर आपत्ति जताई और एमएस डा. एके पांडे को निर्देश दिए कि महिला की मदद करें।
प्रसूता को नहीं मिल रहा था अस्पताल से भोजन
गायनी वार्ड में मंडलायुक्त ने रामनगर निवासी दीपा से इलाज और दवाओं के बारे में पूछा। उन्होंने पूछा कि अस्पताल से आपको भोजन मिल रहा है या नहीं। महिला ने कहा, बाजार से मंगाकर खाना खा रहे हैं। मंडलायुक्त ने कहा कि अस्पताल से आपको 108 घर तक छोड़कर आएगी।
पांडियन ने प्राचार्य एवं एमएस को निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली निशुल्क सुविधाओं के बारे में प्रचार-प्रसार संबंधी सामग्री वार्ड में लगाएं। महिलाओं को अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए।
जेनेरिक दवाएं लिखने की आदत डाल लें डाक्टर
मंडलायुक्त ने एसटीएच में जेनेरिक मेडिकल स्टोर पर हीलाहवाली को लेकर खासी नाराजगी जताई। कहा कि तीन सप्ताह के भीतर जेनेरिक मेडिकल स्टोर खुल जाना चाहिए। एसटीएच में ब्रांड नेम से दवा लिखने वाले डाक्टरों को उन्होंने चेतावनी दी कि जेनेरिक दवाएं लिखने की आदत डाल लें।
कहा कि दोबारा छापा मारने पर अगर ब्रांड नेम से दवा लिखी मिली तो संबंधित डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई होगी। कहा कि जरूरत पड़ने पर डाक्टर को आन काल हर हाल में आना होगा।
एनआईसीयू से नदारद रहते हैं डाक्टर
एनएचएम के तहत एसटीएच में चल रहे एनआईसीयू से डाक्टरों के नदारद रहने का मामला भी मंडलायुक्त के आगे उठा। मंडलायुक्त ने कहा कि तीन डाक्टर में एक डाक्टर हर हाल में एनआईसीयू में रहेगा। उन्होंने कहा कि ये अंतिम चेतावनी है और दोबारा छापे में अगर डाक्टर गायब मिले तो नपेंगे।
उपनल और संविदा कर्मियों की मांग पर शासन से होगी बात
संविदा कर्मियों और उपनल कर्मियों ने नियमितीकरण की मांग रखी। मंडलायुक्त ने कहा कि नियमितीकरण की फाइल शासन में चल रही है। पांडियन ने कहा कि नियमितीकरण के मामले में कार्मिक और वित्त विभाग भी शामिल हैं। दोनों विभागों से बात कर जल्द ही इस मामले को निस्तारित कराने का प्रयास करेंगे।