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उत्तराखंड में ही डीएनए, नार्को और बैलेस्टिक टेस्ट की तैयारी

Wed, 03 May 2017 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी। 
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किच्छा बाईपास बधईपुरा स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला को अत्याधुनिक  तकनीकी से लैस करने की तैयारी चल रही है, ताकि प्रदेश के पुलिसकर्मियों को दूसरे राज्यों का मोहताज न होना पड़े। प्रयोगशाला में डीएनए, नार्को और बैलेस्टिक टेस्ट का विभाग खोलने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
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शासन से मंजूरी मिलने के बाद इन विभागों के सहारे प्रदेश की यह नंबर वन प्रयोगशाला बन जाएगी। बधईपुरा स्थित प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक दयाल शरण ने बताया कि प्रयोगशाला इसी साल 17 जनवरी को शुरू हुई थी। 27 जनवरी से बिसरा और नारकोटिक्स की जांच होने लगी।

अब तक 250 जांच रिपोर्ट अदालत में भेजी गई हैं। इनमें देहरादून से 62 नारकोटिक्स और 86 बिसरा की जांच आई थी। प्रयोगशाला में 20 अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला में उच्च स्तर की जांच डीएनए, नार्को टेस्ट, लाई डिटेक्टर टेस्ट और बैलेस्टिक टेस्ट का विभाग खोलने के लिए प्रशासन आईजी के माध्यम से शासन को भेजा गया है।
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शासन से मंजूरी मिलने पर बड़ी उपलब्धि मिलेगी। इन जांचों के लिए नए उपकरण भी मंगाए जाएंगे। अभी तक देहरादून में इस प्रकार के जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वर्तमान समय में नारकोटिक्स के तहत चरस, अफीम गांजा की जांच जारी है।

टास्कोलॉजी (विष विभाग) से आत्महत्या और हत्या का खुलासा आसानी से होगा। प्रयोगशाला खुलने से अदालत में सही समय से जांच रिपोर्ट भेजे जाने पर पीड़ित को जल्द न्याय मिलेगा। 

नार्कों में मदद करती है सीसीआई 

उत्तराखंड शासन के अनुरोध पर अभी सीबीआई की विशेष टीम नार्कों टेस्ट, लाई डिटेक्टर टेस्ट में मदद करती है। पिछले साल सीबीआई की टीम ने ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में अपहरण और हत्या के मामलों में मदद की थी। 
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