नैनीताल। नैनीताल में आयोजित मानसून माउंटेन मैराथन में कीनिया के अंतरराष्ट्रीय धावक जॉन किसीलु मुइंडी की चुनौती को ध्वस्त करते हुए कोटद्वार के प्रभु महतो ने 1 घंटा 21 मिनट एक सेकेंड के शानदार समय के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। कड़ी टक्कर में कीनिया के मुइंडी 1 घंटा 22 मिनट 21 सेकेंड के साथ दूसरे जबकि मुकेश सिंह बोरा 1 घंटा 23 मिनट 25 सेकेंड का समय लेकर तीसरे स्थान पर रहे। रन टू लिव संस्था की ओर से आयोजित मैराथन में 13 राज्यों के साथ-साथ कीनिया के अंतरराष्ट्रीय एथलीटों सहित करीब 1400 धावकों ने हिस्सा लिया।
रविवार सुबह सात बजे एलआईसी के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक आलोक कुमार सैनी, विपणन प्रबंधक एके चतुर्वेदी व अन्य अतिथियों ने मैराथन को हरी झंडी दिखाई। प्रतियोगिता के सबसे रोमांचक और कांटे के 21 किलोमीटर यानी हाफ मैराथन ओपन पुरुष वर्ग में कोटद्वार के प्रभु महतो ने कीनियाई चुनौती को ध्वस्त कर पहला स्थान हासिल किया। 21 किमी ओपन महिला वर्ग में ज्योति पहले, भावना नेगी दूसरे और एकता रावत तीसरे स्थान पर रहीं। मैराथन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मनोज तिवारी, विशिष्ट अतिथि पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल व उत्तराखंड विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य प्रदीप मणी ने विजेता धावकों को मेडल और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। संस्था संयोजक व अंतरराष्ट्रीय धावक हरीश तिवारी व सागर देवराड़ी ने बताया कि इस बार केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, यूपी और मध्य प्रदेश से धावक पहुंचे थे।
ये रहे विजेता
- 21 किमी, आयु 40 प्लस वर्ग में हरप्रीत सिंह और लीला साह, 50 प्लस वर्ग में नंदन सिंह, वंदना सिंह विजेता।
- 10 किमी ओपन पुरुष वर्ग में राम सिंह पहला, देवेंद्र बिष्ट, बिबेन राई, महिला वर्ग में सोनी बोरा, मीना कोरंगा, कंचन लोधियाल क्रमश: पहले, दूसरे, तीसरे स्थान पर रहे।
- 10 किमी आयु 45 प्लस वर्ग में चंदन सिंह सिरारी, जयंती थपलियाल, 55 प्लस वर्ग में चरन सिंह व रागिनी अग्रवाल अव्वल रहे।
- 5 किमी स्कूली बच्चों के बालक वर्ग में कृष्णा सिंह बिष्ट, बालिका वर्ग में ललिता त्रिपाठी विजयी रहीं।
- 4 किमी रन फॉर फन पुरुष वर्ग में देवेंद्र सिंह बिष्ट, महिला वर्ग में मानसी बिष्ट विजयी रहीं।
बोले- विजेता
- भारत में दौड़ने का अनुभव हमेशा शानदार रहता है। नैनीताल का मौसम अच्छा था, लेकिन यहां के पहाड़ों के उतार-चढ़ाव भरे रास्तों ने कड़ी परीक्षा ली। प्रभु ने वास्तव में एक जादुई रफ्तार दिखाई। अंतिम कुछ मिनटों में वे मुझसे आगे निकल गए और उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया। अगले साल मैं और बेहतर तैयारी के साथ वापसी करूंगा। - जॉन किसीलु मुइंडी
- यह मेरे कॅरिअर की सबसे रोमांचक और कठिन दौड़ थी। कीनिया के जॉन बेहतरीन धावक हैं, इसलिए मैंने शुरुआत से ही अपनी गति और स्टेमिना का संतुलन बनाए रखा। नैनीताल की चढ़ाई और वादियों में दौड़ना आसान नहीं था लेकिन अंतिम समय में मैंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरा लक्ष्य है। - प्रभु महतो