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नैनीताल में सुरक्षित नहीं बेटियां!: हे मां दुर्गा...सुन लो पुकार, 'महिषासुर' कर रहे इनका जीना दुश्वार

Sat, 21 Oct 2023 04:14 PM IST
हीरा मेहरा मयंक जोशी, संवाद

सार

पहाड़ की शांत वादियों में भी बेटियों से बढ़ते दुष्कर्म के मामले हैरान करते हैं। लोगों के जेहन में हैवानियत इस कदर हावी हो गई है कि छोटी बच्चियों के साथ भी दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ गई हैं। आइए जानते हैं आंकड़े
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नैनीताल में क्राइम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा का महत्व सिर्फ धार्मिक दृृष्टिकोण से नहीं है, बल्कि यह महिला शक्ति और समाज में नारी के स्थान का भी प्रतीक है। स्त्रियों की पूजा करने वाले समाज में ऐसे दुष्टों की संख्या भी बढ़ती जा रही है जो स्त्री को उपभोग की वस्तु समझते हैं। यहां तक कि महिलाओं और किशोरियों को अपनी बदनियती का शिकार बनाने से भी बाज नहीं आते। समाज में मौजूद दुष्टों ने बेटियों का जीना इस कदर दुश्वार कर दिया है कि हमारी बेटियों के पास देवी मां दुर्गा से सुरक्षा की गुहार लगाने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है।

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दृष्टिबाधित संस्थान के महासचिव श्याम सिंह धानक को ही ले लें वह भी हर साल नौ दुर्गा पर कन्या पूजन करता था और अब उसकी घिनौनी हरकत उसे कभी सम्मान से देखने वालों को भी शर्मिंदा कर रही है। पिछले ढाई साल की बात करें तो नाबालिग से दुष्कर्म के 271 मामले सामने आए। एक तरह से नौ मामले प्रतिमाह। इन घटनाओं में पुलिस ने 375 लोगों पर मुकदमा कर जेल भेजा है। मानवता और मर्यादा को शर्मसार करने वाली इन घटनाओं पर लगाम लगाने में सिस्टम की नाकामी साफ झलकती है। 

महिला अपराध लगातार बढ़ने से नैनीताल जिला असुरक्षित होता जा रहा है। किशोरियों से दुष्कर्म के बढ़ते मामले पुलिस के साथ समाज की चिंता बढ़ा रहे हैं। यह हम नहीं बल्कि पिछले सालों के महिला अपराध के आंकड़े बताते हैं। जिले में बीते ढाई साल में पॉक्सो से जुड़े 271 मामलों में 375 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।
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महिला सुरक्षा को लेकर सरकार से लेकर पुलिस-प्रशासन की ओर से तमाम दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत रोंगटे खड़े करने वाली है। हाल ही में दृष्टिबाधित बच्चों के संस्थान में बच्ची से यौन शोषण के मामले ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पुलिस विभाग के आंकड़ों की माने तो हर साल नाबालिग से दुष्कर्म के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि पुलिस कार्रवाई भी कर रही है लेकिन बच्चियों से दरिंदगी के बढ़ते मामले कम न होना चिंताजनक है।

जिले में सुरक्षित नहीं हमारी बेटियां
  • वर्ष         पंजीकृत केस       पीड़ित    अभियुक्त
  • 2021         85                   85         132
  • 2022         115                 115        157
  • 2023          71                  71           86
नोट- नैनीताल जिले के साल 2023 के आंकड़े सितंबर तक के हैं।

 

यौन शोषण के मामलों की निस्तारण दर 78 फीसदी
पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में वर्ष 2020 में पॉक्सो के 573 मुकदमें दर्ज हुए थे। 2021 में संख्या 25 फीसदी बढ़कर 712 हो गई। 2022 में प्रदेश के सभी थानों में 19 फीसदी बढ़ोत्तरी के साथ 851 मुकदमें दर्ज हुए। सभी प्रकार के यौन अपराधों में मुकदमों के निस्तारण की दर 78.4 फीसदी है। यौन अपराध के निस्तारण के मामले में उत्तराखंड देश में चौथे नंबर पर है। क्राइम इन इंडिया-2021 की रिपोर्ट के अनुसार नाबालिगों से यौन उत्पीड़न के मामलों में 93.35 फीसदी मामलों में आरोपी परिचित होतें हैं।

बाल यौन शोषण है मानसिक विकार
बच्चों के प्रति यौन रुचि रखना या किसी भी बच्चे के साथ यौन दुर्व्यवहार करना एक मानसिक विकार है इसे पीडोफीलिया कहा जाता है। पीडोफीलिया एक प्रकार का यौन आकर्षण है, जो 13 साल से कम उम्र के बच्चों के प्रति होता है। इसका इलाज मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के जरिए ही संभव है।

 
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अभिभावकों और बच्चों में जागरुकता जरुरी
मनोविज्ञान की प्रोफेसर किरन कर्नाटक ने बताया कि समाज में कुछ लोग धन और प्रतिष्ठा मिलने पर इसका दुरुपयोग करते हैं। मनुष्य में तानाशाही प्रवृत्ति का बढ़ना और कमजोर का फायदा उठाना कई बार यौन अपराध का रुप ले लेता है। बच्चे आसान टारगेट होते हैं, जो अपनी बातें व्यक्त नहीं कर पाते। परिवारों में संस्कार इस कदर विकसित हैं कि बच्चे मां-बाप को कई बातें नहीं बताते। मां बाप को परिवार में ऐसा माहौल और संस्कार विकसित करने की जरुरत हैं कि बच्चे अपनी बातें उनसे शेयर कर सकें। अभिभावकों और बच्चों में जागरुकता तभी संभव है जब अभिभावक खुद बच्चों को जागरूक करेंगे।

दुष्कर्म के मामलों की रोकथाम के लिए पुलिस की ओर कदम उठाये जा रहे हैं। हर थाने में महिला हेल्प डेस्क हैं ताकि महिलाएं अपनी समस्याएं बता सकें। तीन लाख से अधिक लोगों ने गौरा शक्ति एप डाउनलोड किया है। एप के जरिए प्राप्त होने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही हैं। पुलिस की ओर से स्कूल, कॉलेजों और सामाजिक रुप से जागरुकता कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं। एनजीओ की मदद से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
-योगेंद्र सिंह रावत, डीआईजी
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