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जमरानी से मत्स्य आखेट, फिश रेस्टोरेंट की योजना

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हल्द्वानी। बहुउद्देश्यीय जमरानी बांध परियोजना स्थल का जलीय सर्वेक्षण करने के बाद मत्स्य विभाग को बांध से पर्याप्त रोजगार मिलने की उम्मीद है। बांध परियोजना से मत्स्य पालन को रोजगार का प्रमुख जरिया बनाने की कवायद चल रही है। इसमें मछली पालन के विविध आयाम विकसित किए जाएंगे।
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जमरानी परियोजना इकाई ने एडीबी के अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण विशेषज्ञ और परियोजना के राष्ट्रीय पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. राहुल उपाध्याय के सुझाव पर जमरानी बांध क्षेत्र में गोल्डन महाशीर समेत तमाम जलीय जंतुओं का पता लगाने और उनमें से संरक्षित प्रजाति के जलीय जंतुओं को संरक्षण की दिशा में होने वाले प्रयासों के लिए मत्स्य विभाग से सर्वे कराने के लिए पत्र लिखा था। मत्स्य विभाग ने सर्वे के साथ ही बांध परियोजना से मत्स्य विभाग की संभावनाओं को लेकर प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव जमरानी परियोजना इकाई को भेजा गया है। इसकी डीपीआर शासन को भेजी जा रही है।
मत्स्य विभाग का दावा है कि जमरानी बांध बनने पर इसमें मत्स्य पालन, मत्स्य आखेट और मत्स्य आधारित विभिन्न रोजगार परक गतिविधियों से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिया जा सकता है।
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मत्स्य विभाग के उप निदेशक कुमाऊं मंडल भीमताल ने मत्स्य विभाग की ओर से संचालित की जाने वाली गतिविधियों का ड्राफ्ट जमरानी परियोजना इकाई को भेजा है। प्रस्ताव में कहा है कि विभाग ने भीमताल प्रभारी रश्मि रावत, जमरानी परियोजना के सहायक अभियंता शाहनवाज के साथ बांध परियोजना स्थल का स्थलीय निरीक्षण कर मत्स्य पालन की संभावनाएं तलाशीं। निरीक्षण के बाद मत्स्य विभाग ने कार्ययोजना तैयार कर ली है।
मत्स्य कुमाऊं मंडल के उपनिदेशक पीके शुक्ला ने कहा कि मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने जमरानी परियोजना के अधिकारियों के साथ बांध क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया है। यहां मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। मत्स्य विभाग जमरानी बांध परियोजना से मत्स्य पालन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेज रहा है।
मत्स्य विभाग की कार्ययोजना
मछली बीजों का संग्रह: विभाग की ओर से नदी और आसपास के स्थानों से मछलियों के प्रजनन काल के समय उनके बीजों को संग्रह कर बांध के जलाशय में संचय किया जाएगा।
मत्स्य आखेट : जमरानी बांध के आसपास मत्स्य विभाग की ओर से मत्स्य आखेट या फिश एंगलिंग कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें महाशीर एक महत्वपूर्ण गेम फिश है। फिश एंगलिंग से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सौ से अधिक परिवारों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
पर्यटकों के आने से बढ़ेगा रोजगार : मत्स्य आखेट के जरिये देश-विदेश के पर्यटकों को मनोरंजन के नए साधन मिलेंगे। पर्यटकों के आने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर विकसित होंगे।
फिश रेस्टोरेंट या स्टॉल : जमरानी बांध के चिह्नित स्थानों पर पर्यटकों की सुविधा के अनुसार विभिन्न प्रकार के फिश व्यजनों का आनंद उठाने के लिए पांच या तत्कालीन आवश्यकतानुसार फिश रेस्टोरेंट और स्टालों का संचालन किया जाएगा। इससे भी क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलेगा।
पिंजरा संस्कृति : जमरानी बांध के बन जाने के बाद मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केज कल्चर (पिंजरा संस्कृति) के जरिये भी मत्स्य पालन करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इन सभी कार्यों का कुशलतापूर्वक संचालन करने के लिए स्थायी अवस्थापना की जरूरत होगी।
रियरिंग यूनिट: मत्स्य बीजों के संचयन से पूर्व रियरिंग (पालन पोषण) के लिए यूनिट का निर्माण करना जरूरी होगा। बांध में प्रति वर्ष महाशीर, असेला और अन्य मछलियों की पचास हजार फिंगरलिंग (मछली के बच्चे) का संचयन किया जाएगा। इसके लिए कम से कम 200 वर्ग मीटर और अधिक से अधिक 500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले 8 से 10 टैंकों की आवश्यकता होगी।
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