नैनीताल। अपनी खूबसूरती और प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध सरोवर नगरी में सफाई व्यवस्था बेपटरी होने से केड़ के ढेर पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार हैं। सड़कों पर कूड़ा बिखरा पड़ा है। घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था बेपटरी है। बजट होने के बावजूद न तो रीसाइक्लिंग प्लांट बन पाया है और न ही कोई डंपिंग ज़ोन। ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण के नतीजों से पहले ही पालिका के तमाम दावों की पोल खुल गई है।
केंद्रीय शहरी विकास विभाग हर साल 11 मानकों (जैसे- घर-घर कूड़ा उठाव, बाजार और शौचालयों की सफाई) पर स्वच्छता का सर्वे कराता है। खूबसूरत पर्यटन स्थल होने के कारण नैनीताल से सफाई की ज्यादा उम्मीदें रहती हैं क्योंकि गंदगी से पूरे राज्य की छवि पर बुरा असर पड़ता है। घर-घर से कूड़ा उठाने की शुरुआत साल 2006-07 में मिशन बटरफ्लाई के तहत हुई थी। इसके बाद कई निजी कंपनियों को इसका जिम्मा दिया गया लेकिन कोई भी व्यवस्था टिकाऊ या सफल साबित नहीं हुई। पिछले साल कानपुर की दीक्षांक कंपनी का अनुबंध रद्द होने के बाद से नगर पालिका खुद यह काम संभाल रही है लेकिन नई निविदा भी निरस्त हो चुकी है।
सफाई में कब-कितनी रही रैंक
साल 2020 में उत्तराखंड में स्वच्छता के मामले में पहले पायदान पर रहने वाला नैनीताल, पिछले साल गिरकर 45वें स्थान पर पहुंच गया जबकि देशभर में इसे 1029वां स्थान मिला। वर्ष 2022-23 में राज्य स्तर पर पालिका चौथे स्थान पर रही, जबकि 2023-24 में सातवें स्थान पर रही।
प्लांट के लिए नहीं मिली जमीन
प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल करने के लिए एक प्लांट लगाया जाना था जिससे शहर को प्लास्टिकमुक्त करने में मदद मिलती लेकिन नगर पालिका जमीन नहीं ढूंढ पाई। इस कारण अब इसे हल्द्वानी में बनाने का प्रस्ताव है। कूड़ा ढोने वाले पालिका के 18 वाहन भी अपनी समयसीमा पूरी कर चुके हैं जिससे सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
- कूड़ा वाहनों की खरीद की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। पालिका की ओर से कूड़ा उठान एवं निस्तारण की निविदा जल्द की जानी है। शहर में तय प्वाइंट से नियमित कूड़ा उठान एवं सफाई व्यवस्था अधिकारियों की निगरानी में की जाएगी। प्रयास रहेगा कि इस बार पालिका की रैंकिंग में सुधार हो।
- डॉ. सरस्वती खेतवाल, पालिकाध्यक्ष, नैनीतताल