नैनीताल। हिमालय रीजन में पाए जाने वाले औषधीय पौधे विलुप्त होने के कगार पर हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन की जरूरत है। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान में किल्मोड़ा से पाइल्स की दवा तैयार की जा रही है। यह बातें डीएसबी परिसर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल ने कहीं।
मंगलवार को कला संकाय में विजिटिंग प्रोफेसर निदेशालय और बॉटनी विभाग की ओर से आयोजित दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीएस रावत ने किया। विशेषज्ञों ने औषधीय पौधों के संरक्षण-संवर्धन के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।
मुख्य वक्ता प्रो. सुनील नौटियाल ने भारत में पाए जाने वाले औषधीय पौधों की जानकारी पीपीटी के माध्यम से दी। कहा कि कुट, हाथ पंजा, हरड़, जंबु, चोरी छीपी आदि पौधों के उत्पादन पर कार्य किया जा रहा है। जड़ी-बूटियों का किसानों की आर्थिक स्थिति के सुधार में भी योगदान रहेगा।किल्मोड़ा से पाइल्स और चोरी छीपी से काले ज्वर के रोग की दवा तैयार की जा रही है।
कुलपति प्रो. रावत ने कहा कि छात्रों को प्रकृति को जानने की जरूरत है। डॉ. एसएस सामंत ने हिमाचल प्रदेश में पाए जाने वाले औषधीय पौधों की जानकारी साझा की। परिसर निदेशक प्रो. रजनीश पांडे ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र के औषधीय के पौधों के संरक्षण के लिए प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। कार्यक्रम औषधीय पौधों के संरक्षण के लिए डॉ. आईडी भट्ट, प्रो. प्रीति चतुर्वेदी, मो. एसडी तिवारी, डॉ. बीएस कालाकोटी, डॉ. केएस कनवाल, डॉ. आशीष कनवाल को सम्मानित किया गया। संचालन वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने किया।
इस मौके पर प्रो. एसएस बर्गली, प्रो. किरन बर्गली, प्रो. एचसीएस बिष्ट, प्रो. नीलू लोधियाल, प्रो. जीत राम, प्रो. सुषमा टम्टा, डॉ. कपिल खुल्बे, डॉ. नवीन पांडे आदि मौजूद रहे।