दो-दो बेंच से मामला टलने के बाद शनिवार को हाईकोर्ट ने नैनीताल के हेरिटेज भवन पंत सदन को तोडे़ जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। इस मामले को हाईकोर्ट तक ले जाने वाले अजय रावत ने याचिका खारिज होने के बाद कहा कि अब वे इस मामले को प्रधानमंत्री के सामने उठाएंगे।
नैनीताल निवासी अजय रावत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि वर्तमान में उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश के आवास पंत सदन का ध्वस्तीकरण किया जा रहा है।
पंत सदन हेरिटेज भवन है। इसमें भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत देश की आजादी से पहले वर्ष 1937 से 1939 तक बतौर संयुक्त प्रांत के प्रीमियर, वर्ष 1956 से 1950 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और वर्ष 1950 से 1955 तक भारत सरकार के गृह मंत्री रहते हुए रहे थे।
महान दार्शनिक अरविंदो भी वर्ष 1901 में इस भवन में रहे थे। याचिका में कहा कि वह भवन के वर्तमान स्वरूप के मुताबिक उसकी मरम्मत और पुनर्निर्माण के पक्षधर हैं। यह याचिका इससे पहले हाईकोर्ट की दो अलग-अलग पीठों के सामने भी आई थी।
दोनों ही पीठों ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार किया था। शनिवार को तीसरी बार न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट में न्यायाधीश के 11 पद हैं जबकि उनके लिए बंगले कम हैं।
किसी दूसरी जगह भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद पंत सदन को रिनोवेट कराने के लिए और पुनर्निर्माण कराने के लिए विशेषज्ञों की राय ली गई। विशेषज्ञों ने पंत सदन के जीर्णोद्धार करने पर उसकी आयु अधिकतम 10 से 12 वर्ष की मानी और भूकंप या आपदा के लिहाज से भी इसे असुरक्षित माना।
सरकार का कहना था कि इसे तोड़कर पुनर्निर्माण करने की राय दी गई थी। इसमें जीर्णोद्धार के मुकाबले लागत भी कम आ रही है। इसके स्थान पर चार बंगले बनाए जाएंगे।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया। सुनर्वाई के बाद अजय रावत ने कहा कि हेरिटेज पंत भवन को तोड़ने के मामले की शिकायत अब वे प्रधानमंत्री से करेंगे।