विधायकों की खरीद-फरोख्त से संबंधित मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग मामले में सीबीआई की प्रारंभिक जांच को निरस्त करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
शनिवार को हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष कपिल सिब्बल ने रावत की ओर से पैरवी की और कहा कि याची पर भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता। यदि कोई केस बनता है तो वह डा. हरक सिंह रावत तथा स्टिंग करने वाले उमेश शर्मा के खिलाफ बनता है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने उनके विरुद्ध चल रहे सीबीआई जांच को वापस लेने का फैसला लिया गया था। यह जांच एसआईटी को ट्रांसफर कर दी गई थी। ऐसे में सीबीआई की ओर से हो रही जांच को निरस्त किया जाए।
सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की। सिब्बल ने कहा कि याचिकाकर्ता पर कोई भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता है।
इस मामले में यदि कोई केस बनता है तो वह कांग्रेस से निष्कासित नेता डा. हरक सिंह रावत तथा स्टिंग करने वाले उमेश शर्मा के खिलाफ बनता है। हरक सिंह रावत ने साजिश के तहत उमेश शर्मा को स्टिंग के लिए भेजा था।
इस मामले में हरक सिंह रावत और उमेश शर्मा की मिली भगत इस बात से प्रमाणित होती है कि स्टिंग देहरादून में उमेश शर्मा ने किया और उसकी सीडी दिल्ली में हरक सिंह रावत ने जारी की।
साथ ही मामले में प्राथमिकी भी घटनास्थल देहरादून के बजाय दिल्ली में दर्ज कराई गई। इस सीडी में भी मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कोई आपत्तिजनक बात भी नहीं कही है। सिब्बल ने कहा कि सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है।
फिर भी जांच करानी जरूरी हो तो हरक सिंह रावत और उमेश शर्मा की भूमिका की जांच कराई जाए। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तिथि नियत की है।
अगली सुनवाई पर सीबीआई अपना पक्ष रखेगी। बता दें कि पूर्व में इस मामले में मंत्रिमंडल की विशेष बैठक में स्टिंग मामले की जांच एसआईटी से कराने और सीबीआई जांच निरस्त करने का फैसला हुआ था।