श्री गुरु गोविंद सिंह की 350 वीं जयंती पर पंजाब से आए सिख युवकों ने सीतापुर स्थित मैदान में घुड़सवारी कर प्राचीन युद्ध शैली का हैरतंगेज प्रदर्शन किया तो लोग तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। दो घोड़ों पर सवार एक सिख युवक घुड़सवारी करते हुए खड़ा हो गया। इसी प्रकार चार घोड़ों पर दो युवकों ने खड़े होकर लोगों को सैल्यूट किया तो लोग रोमांचित हो गए। इस बीच दो मदमस्त हाथियों को देखने के लिए भीड़ उमड़ी थी।
सीतापुर दानीबंगर स्थित बाबा जगत सिंह गुरुद्वारा के पास धार्मिक दीवान सजाया गया। यहां पंजाब से रागी जत्थे ने कीर्तन और कथा विचार किया। श्री गुरु गोविंद सिंह के बारे में अन्य प्रांतों से आए रागी जत्थे ने बताकर संगत को निहाल किया।
पंजाब से आए प्रमुख जत्थेदार संत बाबा अवतार सिंह दल बाबा विधिचंद छीना की देख रेख में सीतापुर स्थित गुरुद्वारा में कार्यक्रम होना था लेकिन अचानक वे वापस चले गए। इस गद्दी को बाबा अवतार सिंह के बड़े बेटे बाबा प्रेम सिंह ने संभाला। यहां आए हजारों लोगों ने धार्मिक दीवान के आगे मत्था टेका।
शाम को बाबा प्रेम सिंह दो हाथियों और घोड़ों के काफिले के साथ घुड़सवारी के लिए सीतापुर स्थित मैदान आए। यहां बाबा प्रेम सिंह ने घुड़सवारी करते हुए भाले से अपने लक्ष्य को उठाया। इसके बाद एक-एक कर सिख युवकों ने घुड़सवारी का करतब दिखाना शुरू किया।
दो घोड़ों पर पैर रखकर और घोड़े की लगाम दांतों से दबाकर एक सिख युवक ने करीब 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से घुड़सवारी की तो लोग रोमांचित हो गए। इसी प्रकार तीन युवकों ने दो-दो घोड़ों पर सवारी का बेजोड़ प्रदर्शन किया। दल में आए दो युवकों ने चार घोड़ों को एक साथ बांधकर सवारी की तो लोग खुद को रोक नहीं सके।
भीड़ में शामिल लोगों ने नारा लगाया, जो बोले सो निहाल सत् श्री अकाल। गांव के लोग सुबह से ही घुड़सवारी देखने के लिए बेताब थे, शाम को करतब देखे तो खुशी और रोमांच का ठिकाना नहीं रहा। दर्शकों में बूढ़े, बच्चे, महिलाएं और युवक मौजूद थे।
कार्यक्रम में गुरुद्वारा अध्यक्ष मंजीत सिंह, बाबा बलदेव (मुख्य ग्रंथी) विरेंद्र सिंह चड्ढा, हरविंदर सिंह चड्ढा, कुलदीप सिंह भुल्लर, बलकार सिंह, अमरजीत सिंह, ग्राम प्रधान बलजीत सिंह, कुलविंदर सिंह, चरनजीत सिंह, अमरजीत सिंह बंटी, अमरपाल सिंह प्रमुख लोग मौजूद रहे।
बच्चे गतका देखने को परेशान हुए
सीतापुर स्थित मैदान में पंजाब के सिख युवकों ने गतका का प्रदर्शन किया। बच्चे भीड़ के बीच पूरा प्रदर्शन नहीं देख पा रहे थे। इस कारण बच्चे काफी परेशान रहे। कुछ अभिभावकों ने कंधे पर बैठाकर बच्चों को तलवारबाजी और लाठी का प्रदर्शन दिखाया।
चार घोड़ों के दौड़ने पर हुई भगदड़
चार घोड़े जब हिनहिनाते हुए एक साथ भीड़ की तरफ दौड़े तो भगदड़ मच गई, लेकिन प्रशिक्षित सिख युवकों ने घोड़ों को काबू में कर लिया। घोड़ों की दिशा बदलने पर लोगों ने राहत की सांस ली। चोरगलिया थानाध्यक्ष संजय जोशी का कहना था कि घोड़े यदि नियंत्रित नहीं होते तो काफी लोग गूल में गिर सकते थे।
बाबा ने लोगों को किया सम्मानित
संत बाबा अवतार सिंह के पुत्र बाबा प्रेम सिंह ने घुड़सवारी के बाद कार्यक्रम के संचालक वीरेंद्र सिंह चड्ढा को सरोंपा देकर सम्मानित किया। इसके पहले बाबा का आशीर्वाद लेने के लिए महिलाओं और बच्चों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी। बाबा ने सेवादारों को भी सम्मानित किया।
संचालक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि श्री गुुरु गोविंद सिंह ने विधिचंद को उपाधि प्रदान की थी कि विधिचंद छीना, गुरु का सीना, अर्थात विधिचंद गुरु गोविंद सिंह को अपना सीना मानते थे। बाबा अवतार सिंह वीर श्री विधि चंद के वंशज हैं।