रानीबाग से छह किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव अमृतपुर में मूलभूत समस्याआें का भारी अभाव है। सड़क, बिजली, पानी और सिंचाई की समस्याओं के साथ साथ यहां के ग्रामीण बंदरों के आतंक से भी परेशान हैं।
गांव में लगभग 150 परिवार रहते हैं जिनमें से लगभग 50 परिवार बीपीएल श्रेणी में आते हैं। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि शासन और प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुुए कहते हैं कि उन्हें लगता है कि वे कालापानी की सजा काट रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क की बदहाली, पीने के पानी की समस्या और बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए वे काफी लंबे समय से मांग कर रहे हैं। लेकिन संबंधित विभागों की ओर से उनकी मांगों का नजरअंदाज किया जा रहा है।
बंदर भगाने के लिए देते है पांच हजार
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बंदरों का बहुत आतंक है। बंदर आए दिन किसी न किसी को काट देते हैं, साथ ही फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। कहना है कि आम के सीजन में वे 15 से 20 लोगों को पांच हजार प्रति व्यक्ति महीने के हिसाब से बंदर भगाने के लिए रखते हैं।
आने से पहले सड़क का हाल पूछते है रिश्तेदार
हर साल बरसात में सड़क की हालत दयनीय हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति को देखते हुए अब रिश्तेदारों ने भी आना कम कर दिया है। अगर किसी रिश्तेदार या संबंधी को अमृतपुर आना होता है तो वे आने से पहले फोन कर सड़क की स्थिति के बारे में पूछते हैं।
सिंचाई नहर कई जगहों से टूटी
गांव के बीच से गुजरने वाली सिंचाई नहर कई जगहों से टूटी हुई है। टूटी नहर से रिसते पानी से कई घरों में सीलन आ गई है। कई शिकायत के बाद भी विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।