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युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने की पुरजोर वकालत 

Sun, 08 Oct 2017 02:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल। 
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‘कुमाऊं फेस्टिवल ऑफ लिटरेचर एंड आर्ट्स’ कार्यक्रम का आयोजन  - फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। नगर के प्रसिद्ध प्रसादा भवन में शनिवार को हिमालयन इकोज के सहयोग से ‘कुमाऊं फेस्टिवल ऑफ लिटरेचर एंड आर्ट्स’ का आयोजन किया गया। इसमें साहित्य, लोक से जुड़े विषय विशेषज्ञों ने इनके संरक्षण, संवर्धन के बारे में बताया। कहा कि क्षेत्र में भी साहित्य का समृद्ध अतीत रहा है। बेहतर भविष्य के लिए युवा पीढ़ी को भी इन साहित्य, रचनाओं से जोड़ने की सख्त जरूरत है। 
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कार्यक्रम में मुख्य आयोजक जाह्नवी प्रसाद ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि नमिता गोखले ने कार्यक्रम के बारे में बताया। कहा कि साहित्य, लोकस्थानीय लोगों को जोड़ने के लिए यह कार्यक्रम किया जा रहा है। पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल ने निजी प्रयासों से स्थापित संग्रहालय के बारे में बताया। कहा कि इसी के माध्यम से वर्तमान, भविष्य की पीढ़ी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति की जानकारी दी जा सकेगी।

रेडियो के प्रख्यात कहानीवाचक नीलेश मिश्रा ने नैनीताल में बिशप, सेंट जोसेफ समेत डीएसबी की पढ़ाई के दिनों को याद किया। उन्होंने यहां से मुंबई तक के यात्रा पत्रकार, गीतकार के रूप में कार्य के बारे में बताया। कहा कि अब वह गांव कनेक्शन के माध्यम से स्थानीय युवकों जोड़कर साप्ताहिक, दैनिक समाचार पत्र निकाल रहे हैं। कार्यक्रम में मेरू गोखले, गीता पांडे, अदिति मेहरा, वाणि त्रिपाठी ने शिवानी की कई रचनाओं के माध्यम से अपना व्याख्यान दिया।
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अमिताभ बघेल ने संचालन किया। वहां जतिन प्रसाद, प्रो. सीसी पंत, प्रो. अजय रावत, विनय शाह, ज्योतिका आशीष, आलोक साह, गीता साह, किरन जरमाया, रंजीत भार्गव, प्रदीप नारायण, नीलांजना डालमिया, आशा शर्मा गौड़, दिव्या जोशी, नीलू, अमरनाथ, प्रवीण शर्मा, रेड्डी, मुकुल पांडे आदि थे। अब रविवार को यह कार्यक्रम रामनगर के ढिकुली स्थित रिसोर्ट में किया जाएगा।

कुमाऊं फेस्टिवल ऑफ लिटरेचर एंड आर्ट्स कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों से बातचीत

स्थानीय स्तर पर हों साहित्य सम्मेलन : नमिता 
नैनीताल। लेखक, प्रकाशक, साहित्यकार नमिता गोखले ने कहा कि साहित्य सम्मेलन स्थानीय स्तर पर भी होने चाहिए। इससे क्षेत्रीय साहित्य, संस्कृति को बढ़ावा दिलाकर उन्हें राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाया जा सकता है। कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर भी बहुत अच्छे लेखक होते हैं लेकिन उनकी कृतियों से सीमित लोग ही परिचित हो पाते हैं। उन्हें, उनकी कृतियों को लोकप्रिय, प्रसिद्धि दिलाने में स्थानीय स्तर पर आयोजित साहित्य सम्मेलन उपयोगी होते हैं। कहा कि उनका उत्तराखंड के कुमाऊं से नजदीकी रिश्ता रहा है। इसलिए वह कुमाऊं की संस्कृति, परंपराओं, साहित्य के विकास के लिए प्रयासरत हैं। ब्यूरो


साहित्य में क्षेत्रीय संस्कृति का समावेश भी जरूरी
नैनीताल। रेडियो के प्रख्यात कहानीवाचक नीलेश मिश्रा ने कहा कि अच्छे साहित्य लेखन के लिए जहां एक तरफ गहन अध्ययन जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय संस्कृति का समावेश भी जरूरी है। सामाजिक मुद्दों को भी साहित्य में शामिल किया जाना चालिए। उन्होंने कहा आईटी के इस युग में विचारों की अभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम हैं लेकिन हमें सिर्फ अपनी नाराजगी व्यक्त कर भीड़ में गुम नहीं हो जाना चाहिए बल्कि अपने सशक्त विचारों से समाज को नई दिशा दिखाने में अपना योगदान सुनिश्चित करना चाहिए। बताया कि हम ग्रामीण स्तर तक के लेखकों के विचारों को राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से जल्द ही वह एप लांच करेंगे। उन्होंने कुमाऊंनी, गढ़वाली, हिंदी समेत अन्य भाषाओं के लेखकों से आवाहन किया कि वह इस एप से जुड़कर अपने विचारों, रचनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की पहल करें।

अच्छे साहित्य को बढ़ावा देना जरूरी : मठपाल 
नैनीताल। प्रसिद्ध पुरातत्वविद् पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल ने कहा कि अच्छे साहित्य को बढ़ावा दिलाने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर साहित्य सम्मेलन होने चाहिए। साथ ही क्षेत्र आधारित मुद्दों को भी सम्मेलनों में उठाया जाना चाहिए। उन्होंने संग्रहालयों की स्थापना, संग्रहालयों में वस्तुओं के संकलन में केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए नियमों को सरल बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संग्रहालयों के माध्यम से ही किसी भी वस्तु के बारे में गहन जानकारी ली जा सकती है। संग्रहालय शोध छात्रों के लिए काफी हद तक मददगार साबित होते हैं। ब्यूरो

साहित्य में सामाजिक मुद्दों का समावेश जरूरी : जोशी 
नैनीताल। साहित्यकार हृदयेश जोशी ने कहा कि लेखक, साहित्यकार अपनी रचना का लेखन पूरी निर्भीकता के साथ करता है वह किसी के दबाव में आकर अपनी रचना का लेखन नहीं करता है। कहा अच्छा साहित्यकार वही है जो सच को अपने साहित्य में शामिल करने के साथ ही सामाजिक मुद्दों का समावेश करे। साथ ही व्यवस्था के उन पहलुओं को उजागर करना भी उसका उद्देश्य होना चाहिए, जिनसे समाज को किसी प्रकार का लाभ न हो। कहा कि आईटी के इस युग में विचारों की अभिव्यक्ति के लिए कई प्लेटफार्म हैं, लेकिन इन प्लेटफार्म का उपयोग समाज हित में ही होना चाहिए, इनका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। ब्यूरो
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