तीनपानी बाईपास स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय परिसर के पेड़ों में शुक्रवार दोपहर आग लग गई। लपटें कुलपति एवं कुलसचिव के कमरों तक पहुंचने से पहले कर्मचारियों ने रेत और पानी डालकर आग पर काबू किया। वहीं, सूचना देने के 50 मिनट बाद मौके पर फायरब्रिगेड की गाड़ी पहुंची। अग्निशमन के जवानों ने काफी प्रयास कर आग को काबू में किया। कर्मचारियों ने आशंका जताई कि पास के जंगल से आग की चिंगारी विश्वविद्यालय परिसर तक पहुंची है।
मुक्त विवि में कुलपति डॉ. सुभाष धूलिया और अधीनस्थ शिक्षक शुक्रवार दोपहर अपने काम में व्यस्त थे। इस बीच कुलपति कार्यालय के पीछे आग की लपटें देखकर कर्मचारियों ने शोर मचाया। इस पर संस्थान में मौजूद सभी अधिकारी, कर्मचारी और छात्र बाहर निकल गए।
अफरा-तफरी के बीच काफी कंप्यूटर सेट बाहर निकाल लिए। कर्मचारियों ने अग्निशमन यंत्र और रेत की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन आग की लपटें परिसर के उत्तर दिशा की तरफ बढ़ने लगी। विवि के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राकेश रेयाल ने करीब तीन बजे फायरब्रिगेड को फोन कर घटना की जानकारी दी।
रेयाल का कहना था कि काफी प्रयास के बावजूद 100 नंबर नहीं उठा। फायरब्रिगेड की गाड़ी तीन बजकर 50 मिनट पर परिसर में आई। हादसे के दौरान काफी पेड़ जलकर नष्ट हो गए। कुलपति का कहना था कि यदि आग अंदर पहुंचती तो सब कुछ नष्ट हो सकता था।
आग अंदर पहुंचती तो भारी नुकसान होता
कुलपति डॉ. सुभाष धूलिया ने बताया कि उनका कार्यालय प्री फेब्रिकेटेड है। यदि आग अंदर पहुंचती तो दो प्रोफेसर के कमरे, हाल और अन्य कमरों को बचाना मुश्किल हो जाता। गनीमत रही कि आग की लपटें कार्यालय तक नहीं पहुंची। विवि परिसर में अग्निशमन के यंत्र भी काफी छोटे और अपर्याप्त थे।
100 नंबर को चेक क्यों नहीं करते अधिकारी
आग की घटना के बाद पुलिस कंट्रोल नंबर के 100 पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों को शिकायत रहती है कि कंट्रोल रूम का नंबर नहीं उठता है। इस मामले में अधिकारी भी कंट्रोल रूम के नंबर को चेक नहीं करते हैं।