सावधान! 10 रुपए में चार पीस मोमो या एक गिलास गन्ने का रस के साथ आपको डायरिया, पीलिया या टायफायाड जैसी बीमारियां फ्री में मिलेंगी। खुले हुए खाद्य पदार्थों पर मंडराने वाली मक्खियां बीमारियां बांट रही हैं।
शहर में जगह-जगह मोमो, चाऊमीन और गन्ने के रस के ठेले लगे हैं। पीलिया के इलाज में कारगर माना जाने वाला गन्ने का रस ही पीलिया फैलाने का सबसे बड़ा कारक बन रहा है। मोमो और चाऊमीन बच्चों से लेकर बड़ों को तमाम बीमारियां बांट रहे हैं। एक किलो मटन साढ़े तीन सौ से चार सौ रुपए किलो और एक किलो चिकन की कीमत दो सौ रुपए है। ऐसे में आप खुद सोचिए कि ठेलों पर 10 रुपए में चार पीस बिकने वाला नानवेज मोमो में किस तरह का मांस डाला जाता होगा। एक किलो आलू की कीमत 20 रुपए है, जबकि वेज मोमो में अन्य सब्जियां भी पड़ती हैं। वेज मोमो की कीमत भी 10 रुपए में चार पीस है। आप स्वयं तय कर लीजिए कि इतने सस्ते में आपको कैसा मोमो खाने में दिया जा रहा है।
वरिष्ठ फिजीशियन डा. नीलांबर भट्ट का कहना है कि गन्ने का रस पीलिया रोग में काफी कारगर होता है, लेकिन शहर में जगह-जगह बिक रहे गन्ने के रस की मशीन और गन्ने पर बैठने वाली मक्खियां बीमारी का सबसे बड़ा कारण हैं। उन्होंने बताया कि मक्खियां गंदगी में बैठने के साथ ही खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों पर भी बैठती हैं, जिससे पीलिया, डायरिया और टायफायड जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है।
डा. भट्ट ने बताया कि चाऊमीन में अजीनोमोटो का प्रयोग किया जाता है। अजीनोमोटो अधिक मात्रा में शरीर पर जाने में टायफायड हो सकता है। अल्सर जैसी बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।