जिला अस्पताल में निर्माणाधीन आइसीयू वार्ड।
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कोरोना महामारी ने किसी न किसी से कुछ छीना है, बस एक स्वास्थ्य विभाग ही है, जिसके लिए यह महामारी कायाकल्प की तरह साबित हुई है। दूर दराज के इलाकों में जहां वेंटिलेटर समेत अन्य जरूरी उपकरणों का अभाव था वहां तक वेंटिलेटर शासन की ओर से पहुंचाए गए हैं। पर समस्या यह है कि तकनीशियन के अभाव में ये वेंटिलेटर किसी के लिए संजीवनी साबित नहीं हो पा रहे हैं। अल्मोड़ा जिले के तीन सरकारी अस्पतालों को कुल 33 वेंटिलेटर मिले, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि चालू अब तक एक भी नहीं हुआ। शोपीस बने वेंटिलेटर का मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा है और गंभीर मरीजों को मजबूरन हल्द्वानी रेफर करना पड़ता है...
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। पिछले साल होली के बाद प्रदेश में कोरोना का खौफ शुरू हुआ था। 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू की घोषणा की फिर लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन के दौरान हर कोई किसी न किसी तकलीफ से जरूर गुजरा है। किसी ने अपनों को खोया तो किसी की नौकरी चली गई तो किसी की पढ़ाई और व्यापार चौपट हो गया। इन सब परेशानियों के बीच अल्मोड़ा के बेस अस्पताल को 25, जिला अस्पताल को छह और महिला अस्पताल को दो वेंटिलेटर मिले, लेकिन तीनों में से किसी भी अस्पताल में अब तक वेंटिलेटर शुरू नहीं हो पाए हैं। बेस अस्पताल में कुछ महीने पहले ही वेंटिलेटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिला अस्पताल में भी आईसीयू वार्ड तैयार किए जा रहे हैं। बेस अस्पताल की ओर से कई बार वेंटिलेटर संचालित करने के लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने के लिए पत्र भेजा जा चुका है। अब तक डॉक्टरों को प्रशिक्षण नहीं मिल पाने से वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। जिला अस्पताल में आईसीयू कक्ष का निर्माण कार्य अंतिम दौर पर है, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी अब तक वेंटिलेटर स्थापित नहीं होने से मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल पाने से गंभीर मरीजों को हायर सेंटर हल्द्वानी रेफर करना पड़ता है। बेस अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचसी गड़कोटी ने बताया कि प्रशिक्षण नहीं मिलने से अभी वेंटिलेटर शुरू नहीं हो सके हैं। इधर जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरसी पंत का कहना है कि आइसीयू वार्ड में काम चल रहा है। कार्य पूरा होने के बाद वेंटिलेटर भी स्थापित कर दिए जाएंगे।
प्रसूताओं को गंभीर हालत में करना पड़ता है रेफर
अल्मोड़ा। भले ही सरकार कितना भी मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने और महिला स्वास्थ्य को लेकर गंभीर होने के दावे करे। लेकिन वेंटिलेटर के अभाव में प्रसूताओं को भी कई बार हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी बनती जा रही है। नगर के किसी भी अस्पताल में वेंटिलेटर शुरू नहीं होने से सबसे अधिक प्रसूताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।