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वन मार्ग पर कत्यूरी काल के मंदिर!

Mon, 03 Aug 2015 01:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/हल्द्वानी।
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हल्द्वानी वन प्रभाग में कत्यूरी काल के मंदिर के अवशेष जंगल में बिखरे हुए हैं। वन विभाग की टीम ने अब इनके संरक्षण की कोशिश शुरू की है।
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सदियों से लोग टनकपुर जाने के लिए टनकपुर-चोरगलिया के वन मार्ग का इस्तेमाल करते थे। इस रास्ते में घना जंगल पड़ता है, जो कि जौलासाल होते हुए सीधे टनकपुर से जुड़ता है।

 जंगल, वन्यजीवों का खतरा और बाद में बेहतर सितारगंज-टनकपुर जैसे बढ़िया मार्ग बनने के बाद इस मार्ग की उपयोगिता करीब खत्म हो गई। अब केवल वन कर्मी या कुछ लोग ही इसका इस्तेमाल करते हैं।
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इस मार्ग पर डोल पोखरा के बाद छोटे मंदिर समूह के अवशेष बिखरे हुए हैं। डीएफओ चंद्रेशखर सनवाल कहते हैं कि इस तरह के दो से तीन मंदिर है, जो इलाके में है।

एसडीओ प्रकाश आर्य कहते हैं कि मंदिर की शैली, स्थापत्य आदि से लगता है कि यह मंदिर समूह कत्यूरी काल के हैं। आरओ छखाता सुनील गैराला कहते हैं कि इन मंदिरों को संरक्षित करने की कोशिश शुरू की गई है।
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सुरक्षा के भी प्रबंध किए जा रहे हैं। इसके अलावा इतिहासकारों से संपर्क कर मंदिरों के बारे में और जानकारी जुटाई जाएगी।

इतिहासकार प्रो. अजय रावत कहते हैं कि भय दूर करने या फिर मन्नत पूरी होने पर लोग मंदिर बनवाते थे, ऐसी जगहों पर कत्यूरी काल के मंदिरों के अवशेष मिलते रहे हैं।
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