मंडी बाईपास में धर्म की आड़ में कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। कब्जेदारों ने पूरी भूमिका बनाकर बाईपास में करीब 100 मीटर के दायरे में पेड़ों पर अनगिनत कपड़े के लाल रंग के टुकड़े बांधे हैं। यहां अस्थायी मंदिर बनाकर पूजा-पाठ भी शुरू कर दी है। ठीक सामने मंडी का निकासी गेट है।
गेट के आसपास एवं बाईपास में रोजाना लोडिंग और अनलोडिंग के लिए दर्जनों वाहन खड़े होते हैं। कब्जे वाली जगह के आसपास भविष्य में खाने-पीने के फड़ एवं ठेलियों का बड़ा मार्केट बन सकता है। वहीं, वन विभाग और लोनिवि इससे बेखबर है।
ट्रांसपोर्ट नगर से बरेली रोड को जोड़ने के लिए मंडी के ठीक पीछे से बाईपास बना है, जो करीब एक किलोमीटर से अधिक लंबा है, लेकिन बाईपास की चौड़ी सड़क पर कई जगहों पर कब्जा होने लगा है। कुछ लोग अस्थायी तौर पर बांस-बल्ली बेचते हैं तो कुछ लोगों ने धर्म की आड़ पर कब्जे की नींव रख दी है।
मंडी के निकासी गेट के ठीक आसपास बाईपास सबसे चौड़ा है। यहां पर यूपी रोडवेज की लंबी दूरी की बसों के अलावा दर्जनों ट्रक और ट्राले खड़े होते हैं। इन वाहनों में रहने वाले ड्राइवर और कंडक्टरों के खाने-पीने के लिए भोजन और चाय की फड़ ठेलियां लगती हैं। कई जगहों पर तो मटन और चिकन की मोबाइल वैन तक लगती हैं। यह वैन ट्रांसपोर्टर नगर चौराहा, निर्माणाधीन अग्निशमन कार्यालय और मंडी निकासी गेट के पास लगती है।
कब्जे की जिस जगह पर मंदिर की अस्थायी नींव पड़ी है, वहां भविष्य में चाय, भोजन, फास्ट फूड, बीडी-सिगरेट और पान-मसाले की फड़ एवं ठेलियों का बड़ा मार्केट बन सकता है। मंदिर की आड़ में कब्जा करने वालों की मंशा भी शायद यही है।