भूमि खरीदने के बाद दाखिल-खारिज नहीं होने से परेशान महिला को शनिवार को जनसुनवाई में राहत मिली। कमोला में खरीदे गए प्लॉट पर विक्रेता के बैंक लोन की बकाया राशि जमा न होने के कारण दाखिल-खारिज अटका था। आयुक्त दीपक रावत ने विक्रेता को 15 दिन के भीतर बैंक में बकाया 2.60 लाख रुपये जमा करने के निर्देश दिए। तय समय में रकम जमा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
यहां स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में भूमि विवाद, धनराशि के लेनदेन, कार्मिकों की बहाली, विद्युत संयोजन, भरण-पोषण और श्रम विभाग से आर्थिक सहायता सहित विभिन्न मामलों की सुनवाई हुई। आयुक्त ने कई मामलों में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर सहमति के आधार पर समस्या का समाधान कराया। भगवती देवी ने बताया कि उन्होंने कमोला में प्लॉट खरीदा था और उसकी रजिस्ट्री भी हो चुकी है, लेकिन विक्रेता के बैंक लोन की किस्तें जमा नहीं होने के कारण दाखिल-खारिज नहीं हो पा रहा है। इस पर आयुक्त ने क्रेता और विक्रेता को तलब कर बकाया 2.60 लाख रुपये 15 दिन में बैंक में जमा कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा पंतनगर में 15.70 लाख रुपये में प्लॉट खरीदने वाले वैद्यनाथ महतो का मामला भी सामने आया। आयुक्त ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विक्रेता कैलाश कर्नाटक को वैद्यनाथ महतो की रकम वापस करने के निर्देश दिए। उन्होंने बिना लाइसेंस ब्याज पर कर्ज देने का कारोबार को गैरकानूनी बताया।
पत्नी का सामान लौटाने के निर्देश
ग्राम पतेलिया, कोटाबाग निवासी विनोद कुमार और संध्या के प्रकरण में आयुक्त ने विनोद कुमार को पत्नी का सामान वापस करने के निर्देश दिए। सविता के वर्षों से कार्यरत श्रमिकों की बहाली और पुराने बकाया वेतन का भुगतान कराने की मांग पर आयुक्त ने संबंधित संस्थान में भविष्य में पद रिक्त होने पर शिकायतकर्ता को प्राथमिकता देने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई को कहा। इसके अलावा भिकियासैंण निवासी जानकी शर्मा पत्नी प्रकाश शर्मा ने निर्माण कार्य का मूल्यांकन कराने की मांग पर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य का मूल्यांकन कर नियमानुसार देय राशि निर्धारित कर और शेष धनराशि शिकायतकर्ता को लौटाने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में योगेंद्र पाल, नरेंद्र सिंह, श्रोहित कुमार, गौरी देवी, कमला चौहान की समस्याओं का भी आयुक्त ने निस्तारण किया और अधिकांश मामलों में मौके पर समाधान कराया।