काठगोदाम में नौ महीने से फर्जी ढंग से चल रहे साईं कॉलेज ऑफ नर्सिंग को बृहस्पतिवार को प्रशासन ने सील कर दिया। यह कार्रवाई शासन के आदेश पर सिटी मजिस्ट्रेट ने राजकीय मेडिकल कॉलेज की जांच टीम के साथ की। पूछताछ के दौरान संस्थान संचालक जांच टीम को नर्सिंग कोर्स चलाने संबंधी काउंसिल से मान्यता (संबद्धता) के कोई प्रमाण नहीं दिखा सके। सिटी मजिस्ट्रेट ने छात्र-छात्राओं के प्रवेश से संबंधित दस्तावेजों को भी कब्जे में लिया है। संस्थान जीएनएम का फर्जी तरीके से कोर्स चला रहा था।
सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय मेडिकल कॉलेज की टीम को लेकर अपराह्न चार बजे काठगोदाम स्थित साईं कॉलेज आफ नर्सिंग संस्थान पहुंचे। वहां अनियमितताएं देखकर टीम दंग रह गई। सिर्फ होर्डिंग्स और बैनर के जरिये खुद को बेहतरीन नर्सिंग कॉलेज बताने वाले इस संस्थान के पास मान्यता संबंधी कोई अभिलेख नहीं थे। सिटी मजिस्ट्रेट ने संचालक एचएस चौहान से छात्र-छात्राओं के प्रवेश की लिस्ट एवं उससे संबंधित अन्य कागजात मांगे मगर वह नहीं दिखा पाए। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि जांच पड़ताल में पता चला कि पिछले साल सितंबर में यह संस्थान खोला गया था। इसमें केवल कैरियर काउंसिलिंग करने की बात कही गई थी लेकिन बाद में फर्जी ढंग से जीएनएम कोर्स चलाया जाना लगा। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि प्रथम दृष्टया संस्थान फर्जी प्रतीत होने पर सभी दस्तावेजों को कब्जे में लेकर संस्थान को तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया गया। बाद में जांच टीम संस्थान के संचालक एचएस चौहान को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय ले आई, वहां करीब एक घंटे तक जांच टीम के सदस्यों और सिटी मजिस्ट्रेट उपाध्याय ने उससे पूछताछ की लेकिन संचालक कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे सका। इसके उपरांत भवन स्वामी एवं अन्य गवाहों के आधार पर संस्थान संचालक द्वारा मान्यता संबंधी अभिलेख दिल्ली से लाकर दिखाने की मोहलत मांगने पर भवन स्वामी एवं अन्य लोगों की गवाही पर उसे सिटी मजिस्ट्रेट ने अनुमति दे दी।
87500 हजार के चेक भी बरामद
हल्द्वानी। साईं कॉलेज ऑफ नर्सिंग संस्थान से प्रशासन ने 29 छात्राओं की एक लिस्ट भी बरामद की है जिसमें छात्राओं के नाम के आगे 50 हजार से लेकर 80 हजार रुपये तक की फीस अंकित है। सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय ने बताया कि संस्थान से 80 हजार और 7500 रुपये के दो चेक भी मिले हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा तमाम बच्चों के मूल प्रमाणपत्र भी जमा किए हुए हैं। संस्थान की गंभीरता से जांच पड़ताल की जा रही है। इसमें और कौन कौन लोग शामिल हैं इसका पता लगाया जा रहा है। संस्थान संचालक चौहान ने खुद को दिल्ली का निवासी बताया है।
चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने दिए थे जांच के आदेश
हल्द्वानी। फर्जी ढंग से जीएनएम एवं एएनएम कोर्स चलाने संबंधी शिकायतें प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा निदेशक को मिली थी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने 25 अप्रैल को हल्द्वानी राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. चंद्र प्रकाश भैसोड़ा को इस मामले की जांच पड़ताल करने आदेश दिए थे। प्राचार्य प्रो. भैसोड़ा को टीम गठित करने में दो महीने लग गए। टीम में टीबी और चेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष एसोसिट प्रोफेसर आरजी नौटियाल, राजकीय नर्सिंग कालेज की प्राचार्य ललिता बिष्ट थे। प्रशासन की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट को शामिल किया गया था।