पंत नगर में सेना के ड्रोन हवाई जहाज उड़ाने की जगह मालवाहक जहाज उड़ाने की योजना है। सेना के अफसरों ने वर्तमान हवाई अड्डे के बगल में जो भूमि देखी थी, उसे मालवाहक जहाजों को उड़ान के लिए देने की तैयारी है। मालवाहक जहाजों को उड़ाने और संसाधन जुटाने के लिए हवाई अड्डा, पत्थर चट्टा आदि जगहों पर वन भूमि लेने पर पहले चरण में विचार किया गया है।
पंत नगर हवाई अड्डे से बड़े सवारी जहाज उड़ सकें। इसलिए तराई केंद्रीय वन प्रभाग ने करीब 16 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया को सौंपी। करीब दो साल पहले सेना (साटा बैट्री) के अधिकारियों ने अपना एयर बेस बनाने के लिए पंत नगर हवाई अड्डे से सटी हुई भूमि देखी थी।
यहां से ड्रोन विमान उड़ाने की बात थी। शुरुआत में भूमि हस्तांतरण को लेकर सेना के अधिकारियों ने हल्द्वानी स्थित तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत भी की थी। विभाग के अफसर भी मान रहे थे कि यह जमीन बाद में सेना को चली जाएगी।
इसी बीच ऊधम सिंह नगर प्रशासन ने पंत नगर हवाई अड्डे से समान ढुलाई की सुविधा भी विकसित करना चाहता है। बताया जाता है कि इसके लिए करीब 500 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। ऐसे में हवाई अड्डे के आसपास की सभी भूमि लेने की योजना पर पहले चरण में विचार किया गया।
सूत्रों के अनुसार इसमें जो आरक्षित वन भूमि सेना के लिए भी देखी गई है, उसको भी एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया को सौंपने पर सहमति बनी है। इसके अलावा पंत नगर के तराई स्टेट फार्म की भूमि, फिर पत्थर चट्टा के पास वन भूमि और दूसरी तरफ पंत नगर की आवासीय कालोनी की जमीन लेने की योजना है।
बताया जाता है कि आवासीय कालोनी में रहने वाले लोगों को दूसरी जगह पुनर्वास किया जाएगा। डीएम ऊधमसिंह नगर पंकज पांडेय का कहना है कि माल वाहक जहाजों को उड़ाने की योजना है। इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।