हल्द्वानी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के मंत्रिमंडल से साफ जाहिर है कि अब कुमाऊं में भाजपा ने एक और पावर सेंटर को जगह दे दी है। इस चुनाव तक कुमाऊं में पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के वर्चस्व को पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से चुनौती मिल रही थी। यशपाल आर्य की एंट्री ने इस समीकरण को उलट पुलट दिया था।
अब कैबिनेट में गदरपुर विधायक अरविंद पांडे की एंट्री से एक और पावर सेंटर कुमाऊं की भाजपा की राजनीति में उभर कर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल रहे पिथौरागढ़ विधायक प्रकाश पंत के नाम पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने शायद ही असहमति जताई हो। कोश्यारी से तवज्जो सोमेश्वर विधायक रेखा आर्या को ज्यादा मिली। इन दोनों के कैबिनेट में जगह मिलने से कोश्यारी थोड़ा बहुत संतोष जरूर कर सकते हैं।
इतना होने पर भी कुमाऊं में अब भाजपा कई पावर सेंटर्स में बंटती दिख रही है। ठीक चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए बाजपुर विधायक यशपाल आर्य चुनाव में ही भाजपा में एक अलग केंद्र के रूप में उभरे थे। भाजपा के परिवारवाद केविरोध से इतर आर्य अपने बेटे संजीव आर्य को भी टिकट दिलाने में सफल रहे थे। अब कैबिनेट में जगह बनाकर आर्य ने अपने हैवीवेट होने का अहसास भाजपाइयों को भी करा ही दिया। ऐसे में आर्य का अब भाजपा में पहचान स्थापित करना अब और आसान हो गया है।
ऊधमसिंह नगर में आर्य और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की उपस्थिति का ही सबब रहा कि गदरपुर से अरविंद पांडे को भी कैबिनेट में जगह मिल ही गई। पांडे की संघ की पृष्ठभूमि भी इसमें सहायक बनी। इतना होने पर अब पांडे भी एक पावर सेंटर के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे।
कैबिनेट से साफ जाहिर है कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भी ठीक तवज्जो मिली है। नरेंद्र नगर विधायक सुबोध उनियाल बहुगुणा की पसंद बताई जा रही है। इसी तरह से हरक को भी बहुगुणा का साथ मिला। इस संतुलन साधने की कोशिश में कुमाऊं के कई वरिष्ठ नेता भी मायूस होकर रह गए। कालाढुंगी के विधायक बंशीधर भगत, पूर्व मंत्री बलवंत सिंह भौर्याल, पूर्व मंत्री बिशन सिंह चुफाल आदि हैं, जो कैबिनेट में बर्थ पाने से वंचित रह गए।