ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग में वीरभट्टी पर नवनिर्मित बैली ब्रिज में आई तकनीकी खामी की जांच का कार्य विशेषज्ञों की देखरेख में शुक्रवार को शुरू कर दिया गया। इसके लिए पुल की प्लेटों को हटा कर जांच की जा रही है। पहले दिन की जांच में कोई बड़ी तकनीकी खामी पकड़ में नहीं आई। शनिवार को भी जांच, नट बोल्ट को कसाव देने का कार्य किया जाएगा।
गैस सिलेंडर से भरे वाहन में आग लगने के बाद 25 सितंबर को वीरभट्टी पुल से आवागमन बंद हो गया था। यातायात की बहाली के लिए उक्त स्थल पर बैली ब्रिज का निर्माण कराया गया। तब 68 दिन बाद दो दिसंबर को बमुश्किल यातायात सुचारु हुआ था कि अगले दिन ही पुल के पैनल तिरछे, सर्पीले आकार में घूम गए। इससे पुल का अस्तित्व खतरे में आ गया।
इस कारण बड़े यात्री, भार वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया। बृहस्पतिवार को अगरतला त्रिपुरा से पहुंचे विशेषज्ञों स्वदेश रंजन शर्मा, शुभेंदु शर्मा ने पुल के प्लेटों को हटाकर जांच का निर्णय लिया। इसके बाद शुक्रवार, शनिवार को दो दिन के लिए सभी प्रकार के वाहनों का संचालन रोक दिया गया था।
इसी क्रम में शुक्रवार को भी पुल की सभी प्लेटों को हटाकर उसके छोटे-बड़े सभी पुर्जों की जांच शुरू कर दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि शुक्रवार की जांच में कोई बड़ी खामी या तकनीकी कमी नहीं मिली। इसलिए माना जा सकता है कि प्रथम चरण में ही ज्यादा भार पड़ने के कारण पुल के पैनल में तिरछापन आया।
वरिष्ठ विशेषज्ञ स्वदेश ने दोनों ओर से एक-एक कर वाहनों के निकलने की व्यवस्था को जरूरी बताया। शनिवार को भी जांच होगी। इस दौरान ईई महेंद्र कुमार, एई ललित तिवारी, जेई दीपाक्षी टम्टा आदि थे।
बैली ब्रिज की उम्र 20 साल तक हो सकती है
एनएच के अधिकारी नवनिर्मित बैली ब्रिज की उम्र मात्र दो तीन वर्ष बता रहे हैं, वहीं इसके विपरीत अगरतला त्रिपुरा से आए वरिष्ठ विशेषज्ञ स्वदेश शर्मा ने बताया कि यदि उचित देखभाल हो तो बैली ब्रिज की उम्र 20 वर्ष तक होती है। उन्होंने कहा कि यदि बैली ब्रिज के हिस्सों की नियमित अंतराल में जांच हो। हर तीसरे महीने नट-बोल्ट में कसाव दिया जाता रहे और रंग रोगन होता रहे तो पुल की उम्र 20 वर्ष तक भी हो सकती है।