पिछले वर्षों के दौरान आमतौर पर दिसंबर-जनवरी में जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में औसत न्यूनतम तापमान 0.5 डिग्री सेल्सियस से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रिकार्ड होता था। लेकिन इस बार इस अवधि में पारा न तो 2.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे उतर रहा है और न ही बरसात होने के कहीं कोई आसार नजर आ रहे हैं।
ऐसे में धरती शुष्क पड़ गई है जिसका असर यह हुआ है कि हाल के दिनों में बोए गए गेहूं, सरसों, मटर, मसूर सब्जी और मसाला प्रजाति के बीज अभी तक अंकुरित नहीं हुए हैं। दूसरी ओर जमीन के भीतर स्थित बीजों में कवक जनित बीमारियों के संक्रमण की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संस्थान क्षेत्रीय ब्यूरो केंद्र निगलाट (एनबीपीजीआर) के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों क्रमश: डा. कुलदीप सिंह नेगी, डा. आईएस बिष्ट, डा. सुरेश वर्मा व डा. पूरन मेहता की मानें तो दिसंबर में बारिश न होने का सीधा असर रबी की फसलों पर नजर आने लगा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों तक जो रोग फरवरी के बाद तापमान बढ़ने पर फसलों में नजर आए थे वह इस बार अभी से नजर आने लगे हैं।
इनमें अंकुरित हुए पौधों में भूरी और पीली गेरुई का प्रकोप देखा जा रहा है। वैज्ञानिकों की मानें तो इन बीमारियों के तेजी से फैलने का कारण बढ़ता हुआ तापमान है। उन्होंने कहा कि यदि अभी भी बारिश नहीं हुई तो रबी की फसल का उत्पादन 30-40 फीसदी तक कम हो जाएगा।
राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संस्थान क्षेत्रीय ब्यूरी केंद्र के पास मौजूद मौसम के आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष पिछले वर्षों की अपेक्षा दिसंबर और जनवरी के शुरुआती दिनों में औसतन तापमान 2 डिग्री सेल्यिस अधिक पाया गया है और इस अवधि में अभी तक बारिश भी केवल 3 एमएम ही हुई है।
एनबीपीजीआर के वैज्ञानिकों ने काश्तकारों को सलाह दी है कि यदि रबी के सीजन में पौधे की पत्तियां भूरी पड़कर मुरझाने लगें तो 2 ग्राम एम-45 अथवा जेड-78 नामक कवकनाशी रसायन को एक लीटर पानी में घोलकर 14-15 दिन के अंतराल में छिड़काव करें। इसके अलावा बीज की बुवाई से पहले उक्त रसायनों का प्रयोग कर शोधित बीज बोने से बीज जनित बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इस साल नवंबर और दिसंबर में कतई बारिश नहीं होने से असिंचित इलाकों में बीज का अंकुरण नहीं हुआ। इसका सीधा असर कृषि के उत्पादन पर पड़ेगा। इस बार उत्पादन काफी कम होगा। पंत विवि के मौसम विज्ञानी डा. एचएस कुशवाहा के मुताबिक फसलों के लिए नमी का होना बेहद जरूरी है। बारिश नहीं होने से जमीन सूखी है। अभी तक बीज अंकुरित नहीं होने से फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। पैदावार भी कम होगी।