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पुल बने तो नकैल में बहे विकास की धारा

Tue, 10 Feb 2015 02:06 AM IST
निशांत खनी /अमर उजाला, हल्द्वानी
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गौलापार लछमपुर ग्राम पंचायत का नकैल गांव विकास की हकीकत से कोसों दूर है। गौलापार से गांव को जोड़ने के लिए सूखी नदी पर आज तक पुल और पक्की सड़क नहीं बन सकी है। हल्की सी बरसात में नकैल का गौलापार से संपर्क कट जाता है। गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं तो दूर स्कूल तक नहीं है। हल्द्वानी से मात्र 10 किलोमीटर दूर इस गांव तक 2013 में सिर्फ तत्कालीन डीएम निधिमणि त्रिपाठी ही पहुंचीं थीं। उनके प्रयासों से ही अब जाकर गांव में पेयजल के लिए ट्यूबवेल लगा है।
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नकैल गांव एक कटोरे के रूप में बसा है। चोरों तरफ घने जंगल से घिरे गांव में 80 परिवार हैं। रोजगार के लिए पलायन होने से साल दर साल परिवारों की संख्या कम हो रही है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या सूखी नदी पर पुल और पक्की सड़क का न होना है। ग्रामीण बिशन दत्त पांडे बताते हैं, लछमपुर से नकैल की दूरी मात्र दो किलोमीटर है। इसके बीच में सूखी नदी है। नदी हर साल तबाही मचाती है और कच्ची सड़क को बहाकर ले जाती है। हल्की सी बरसात में नकैल की स्थिति अंडमान निकोबार द्वीप की तरह हो जाती है।

मोहन चंद्र पांडे बताते हैं कि गांव में स्कूल नहीं है। छोटे बच्चे दो किमी दूर लछमपुर पढ़ने आते हैं, जबकि इंटर की पढ़ाई के लिए चार किमी दूर कुंवरपुर आना पड़ता है। बरसात में हफ्तों-महीनों तक बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। जय दत्त भट्ट और पूर्व प्रधान बडौला बताते हैं ग्रामीणों की आजीविका खेतीबाड़ी और पशुपालन पर निर्भर है। उस पर भी सुअर, नील गाय, बारहसिंगा और हाथियों से फसलों को नुकसान पहुंचता है।
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जंगली जानवरों से फसल बचाने के लिए वन विभाग से सोलर फेंसिंग लगाने की कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई। गुड्डू गणेश भट्ट कहते हैं, गांव में अस्पताल नहीं है। गांव में ट्यूबवेल लगा है, लेकिन कनेक्शन अभी नहीं मिले हैं। पेयजल और सिंचाई के लिए पाड़ा स्रोत पर निर्भरता है। इसमें भी कई जगहों पर नहर और नल टूट चुके हैं। 
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