नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की टीम ने रविवार को गौला नदी में वैध और अवैध खनन की जांच पड़ताल की। टीम ने सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक सभी अधिकृत 11 गेटों में पहुंचकर खनन क्षेत्र की पैमाईश की। टीम को जांच पड़ताल में कई गंभीर खामियां मिली हैं। अब टीम जांच रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगी।
गौला से जमकर वैध और अवैध खनन होता है। 2013 में हल्दूचौड़ निवासी दिनेश पांडे ने गौला खनन पर एनजीटी में याचिका दायर की थी। याचिका पर ही टीम शनिवार शाम हल्द्वानी पहुंची। रविवार सुबह टीम तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ डॉ. मधुकर धकाते, उप निदेशक खान राजपाल लेघा, एसडीएम पंकज उपाध्याय और वन निगम के डीएलएम के साथ निरीक्षण के लिए पहुंचे। निरीक्षण की शुरुआत नैनीताल रोड शीशमहल से हुई और इमली घाट शांतिपुरी (ऊधमसिंह नगर) में निरीक्षण कार्य पूरा किया गया।
टीम ने सभी गेटों से हुए वैध और अवैध खनन की पैमाईश की। खदान के बाद हुए गड्ढों की अनुमानित गहराई और लंबाई की पैमाईश की। जिन गेटों से अवैध खनन को लेकर वन निगम पर 13 करोड़ 50 लाख का जुर्माना लगाया गया था, वहां भी पैमाईश की गई। सभी अधिकारी टीम के साथ रहे। डीएफओ पराग मधुकर धकाते के मुताबिक 10 साल 1495 हेक्टेयर में 54.25 लाख घन मीटर में खनन होना है। गौला के 11 गेटों में सात हजार वाहन खनन से जुड़े हैं।
एनजीटी के साथ शासन की टीम भी रही
उत्तराखंड सरकार ने भी खनन की जांच के लिए वन संरक्षक राजेंद्र सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में सात सदस्यीय टीम गठित की है। शासन से गठित टीम भी एनजीटी की टीम के साथ निरीक्षण में रही।