आखिरकार वहीं हुआ जिसका डर था। बदहाल सुशीला तिवारी अस्पताल में दम तोड़ रही व्यवस्था के बीच एकमात्र न्यूरो सर्जन डॉ. मिथिलेश पांडे ने इस्तीफा दे दिया है। दूसरी ओर फिजियोलाजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जयंती पांडे ने भी अपना त्यागपत्र प्राचार्य को थमा दिया है।
सुशीला तिवारी अस्पताल अराजकता का गढ़ बनता जा रहा है। एसटीएच में विभागाध्यक्ष अपनी मनमानी पर उतरे हैं। प्राचार्य और चिकित्सा-शिक्षा निदेशक तमाशा देखने के सिवाय कुछ कर नहीं पा रहे हैं। हाल ही में ब्लड बैंक में नियुक्ति के मामले में हंगामा हुआ था।
साक्षात्कार देने आए लोगों ने गंभीर आरोप लगाए थे। पिछले साल भी एनस्थीसिया विभाग की मनमानी के कारण हालात बिगड़े थे और न्यूरो सर्जन डॉ. मिथिलेश पांडे ने इस्तीफा दिया था। हालांकि चिकित्सा-शिक्षा निदेशक और प्राचार्य ने बातचीत कर रास्ता निकाला था और डॉ. पांडे ने इस्तीफा वापस ले लिया था।
एनस्थीसिया विभाग की मनमानी के चलते ही डॉ. दीपक पंवार अस्पताल छोड़कर गए थे। हाल ही में एनस्थीसिया विभाग ने न्यूरो, प्लास्टिक सर्जरी और आर्थोपेडिक विभाग की ओटी के दिन कम कर दिए थे। इस पर जब विवाद खड़ा हुआ तो प्राचार्य से लेकर एमएस तक एनस्थीसिया विभाग के बचाव में खड़े हो गए थे।
अव्यवस्थाओं से परेशान अब न्यूरो सर्जन डॉ. मिथिलेश पांडे ने अपना त्यागपत्र प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा को सौंप दिया है। एसटीएच, मेडिकल कॉलेज प्रशासन से लेकर शासन स्तर पर बैठे अधिकारियों को भले ही इससे फर्क न पड़े मगर पहाड़ से आने वाले मरीजों को न्यूरो संबंधी समस्याओं एवं सर्जरी के लिए अब निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
डॉ. पांडे ने नोटिस के साथ इस्तीफा दिया है।
लोगों को जहां बेहतर अवसर मिलेगा वे छोड़कर वहां जाएंगे। छोड़कर जाने वालों को हम कैसे रोक सकते हैं।
डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज